12 साल में पंचायत सुधार: 3.18 करोड़ प्रॉपर्टी कार्ड और AI गवर्नेंस
🏘️विकसित भारत की नींव: ग्रामीण विकास और पंचायत सुधारों के 12 साल, 3.18 करोड़ संपत्ति कार्ड और AI गवर्नेंस से बदली तस्वीर”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
‘असली भारत गांवों में बसता है’ – इस कहावत को चरितार्थ करते हुए पिछले 12 वर्षों में ग्रामीण भारत ने अभूतपूर्व बदलाव और प्रगति देखी है।
पंचायती राज संस्थानों (PRIs) को मजबूत करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय द्वारा कई ऐतिहासिक पहल की गई हैं, जिन्होंने लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण, डिजिटल शासन और राजकोषीय स्वायत्तता को नई ऊंचाइयां दी हैं।
‘The Politics Again’ की इस विशेष रिपोर्ट में आइए विस्तार से जानते हैं पिछले एक दशक में ग्राम पंचायतों में हुए वे बड़े सुधार, जिन्होंने ‘विकसित भारत’ के जमीनी स्तर के निर्माण में सबसे अहम भूमिका निभाई है:
📱100% डिजिटलीकरण: ‘ई-ग्रामस्वराज’ और ‘स्वामित्व’ योजना का कमाल
इन 12 सालों की सबसे परिवर्तनकारी पहलों में से एक रही है ‘स्वामित्व योजना’ (SVAMITVA Scheme)।
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संपत्ति कार्ड: साल 2020 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक ड्रोन सर्वेक्षण के जरिए 1.92 लाख गांवों में लगभग 3.18 करोड़ संपत्ति कार्ड बांटे जा चुके हैं।
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इससे ग्रामीण इलाकों में संपत्ति विवाद घटे हैं और लोगों को बैंकों से लोन मिलने में आसानी हुई है।
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ई-ग्रामस्वराज: वित्तीय प्रबंधन को डिजिटल बनाते हुए ‘ई-ग्रामस्वराज’ प्लेटफॉर्म से 2.59 लाख से अधिक पंचायतों को जोड़ा गया है।
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इसके जरिए अब तक 3.16 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ऑनलाइन लेन-देन हुए हैं, जिसने पंचायत के फंड में भारी पारदर्शिता लाई है।
💰 पंचायतों के फंड में ऐतिहासिक 84% की वृद्धि
मंत्रालय ने राजकोषीय विकेंद्रीकरण (Fiscal Decentralization) को मजबूती दी है।
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अनुदान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: पंद्रहवें वित्त आयोग के तहत ग्रामीण निकायों को 2.82 लाख करोड़ रुपये दिए गए, जो अब तक का सबसे अधिक है।
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इसे एक कदम और आगे बढ़ाते हुए 16वें वित्त आयोग (2026-27 से 2030-31) ने ग्रामीण निकायों के लिए 4,35,236 करोड़ रुपये की सिफारिश की है, जो पिछले आवंटन से लगभग 84 प्रतिशत अधिक है।
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इससे पंचायतों को स्थानीय स्तर पर खुद का राजस्व जुटाने और आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।
🤖ग्रामीण प्रशासन में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की एंट्री
शहरी भारत ही नहीं, बल्कि अब ग्रामीण भारत भी आधुनिक तकनीक और AI का इस्तेमाल कर रहा है।
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सभासार (Sabhasaar): मंत्रालय ने अगस्त 2025 में AI-सक्षम प्लेटफॉर्म ‘सभासार’ लॉन्च किया। इसके जरिए 23 भारतीय भाषाओं में ग्राम सभा की बैठकों का स्वचालित ‘मिनट्स’ (कार्यवृत्त) तैयार किया जाता है।
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मौसम पूर्वानुमान: अक्टूबर 2024 में भारत की पहली ‘ग्राम पंचायत-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान’ पहल शुरू की गई, जिससे किसानों को हर घंटे मौसम की सटीक जानकारी मिल रही है।
👩🎓क्षमता निर्माण और ‘महिलाओं व युवाओं’ का सशक्तिकरण
शासन को मजबूत बनाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए गए हैं।
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प्रशिक्षण: ‘राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान’ (RGSA) के तहत 4.10 करोड़ से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है। इनमें 33.55 लाख से अधिक महिला प्रतिनिधि शामिल हैं।
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युवाओं की भागीदारी: ‘मॉडल यूथ ग्राम सभा’ (MYGS) पहल के जरिए स्कूली छात्रों को ग्राम सभा की नकली (Mock) कार्यवाही कराकर जमीनी स्तर के लोकतंत्र से रूबरू कराया जा रहा है।
पिछले 12 वर्षों के इन निरंतर और कड़े संस्थागत सुधारों, डिजिटल नवाचार और महिलाओं के सशक्तिकरण से भारत की पंचायतें आज विकास के मॉडल का सबसे मजबूत स्तंभ बन चुकी हैं।
नोट: ग्रामीण विकास, पंचायती राज व्यवस्था के नए सुधारों और सरकारी योजनाओं की हर प्रामाणिक रिपोर्ट के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।











