समुद्र के रास्ते बड़े मालवाहक जहाज (VLGC) से एलपीजी कंटेनर्स का आयात

भारत की LPG रणनीति बदली, अमेरिका बना बड़ा सप्लायर

ईरान युद्ध का असर: भारत की LPG आयात रणनीति में बड़ा उलटफेर, मिडल ईस्ट की जगह अमेरिका बना सबसे बड़ा सप्लायर”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में हाल ही में हुए ईरान युद्ध और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भारत की रसोई गैस (LPG) आयात रणनीति को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है।

घरेलू बाजार में गैस की किल्लत न हो, इसके लिए भारत ने अपने पारंपरिक मिडल ईस्ट आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम कर दी है और दुनिया के अन्य देशों का रुख किया है।

इस नई रणनीति में अमेरिका (USA) भारत के लिए सबसे बड़ा LPG आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। हालांकि, लंबी समुद्री दूरी के कारण इस कदम से माल ढुलाई (लॉजिस्टिक्स) की लागत बढ़ गई है।

आयात के आंकड़ों में बड़ा बदलाव

कैस (CAS) डेटा के अनुसार, मार्च 2026 में भारत के एलपीजी आयात के पैटर्न में एक नाटकीय बदलाव देखने को मिला है। पश्चिम एशिया से आने वाली गैस की मात्रा में भारी गिरावट दर्ज की गई है:

अवधि (मार्च 2026)

कुल LPG आयात

मिडल ईस्ट की हिस्सेदारी

अन्य क्षेत्रों की हिस्सेदारी

5 मार्च तक (सप्ताह)

3,22,000 मीट्रिक टन

100% (लगभग)

शून्य

19 मार्च तक (सप्ताह)

2,65,000 मीट्रिक टन

89,000 मीट्रिक टन (34%)

1,76,000 मीट्रिक टन

आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि जो मिडल ईस्ट पहले पूरी आपूर्ति कर रहा था, वह जनवरी के बाद से अपने सबसे निचले स्तर (महज 34%) पर आ गया है।

अमेरिका के साथ 22 लाख टन की बड़ी डील

मिडल ईस्ट से निर्भरता कम करने के लिए भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने अमेरिका के साथ एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट किया है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (Crisil) की रिपोर्ट के अनुसार:

  • बड़ी डील: साल 2026 के लिए भारत ने अमेरिका से 22 लाख मीट्रिक टन एलपीजी आयात करने का समझौता किया है, जो भारत की कुल आवश्यकता का लगभग 10 प्रतिशत है।

  • लगातार आ रहे जहाज: यह डील हर महीने लगभग चार बड़े वीएलजीसी (VLGC) जहाजों की खेप के बराबर है।

  • 2026 के शुरुआती दो महीनों में ही भारत 4,80,000 मीट्रिक टन (करीब 11 जहाज) अमेरिकी एलपीजी मंगा चुका है।

  • बढ़ी हिस्सेदारी: फरवरी में भारत के कुल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी सिर्फ 8% थी, जो अप्रैल 2026 तक छलांग लगाकर लगभग एक-तिहाई (33%) हो गई।

इन देशों से भी बढ़ा आयात, पर ढुलाई लागत बनी चुनौती

अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए भारत ने केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि कई अन्य देशों के साथ भी व्यापार बढ़ाया है।

अप्रैल में ईरान ने भारत के आयात मिश्रण में वापसी करते हुए लगभग 6% खेप की आपूर्ति की। इसके अलावा भारत ने अर्जेंटीना, चिली, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे देशों से भी एलपीजी मंगवाई है।

इस विविधीकरण (Diversification) से देश में रसोई गैस की कोई कमी तो नहीं हुई, लेकिन अमेरिका और दक्षिण अमेरिका जैसे दूरस्थ देशों से आयात करने के कारण समुद्री परिवहन दूरी बढ़ गई है, जिसके चलते तेल कंपनियों को भारी लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई लागत चुकानी पड़ रही है।