Election Commission of India headquarters Nirvachan Sadan in New Delhi where CEC Gyanesh Kumar and Election Commissioners held a key meeting on SIR

SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग के 5 बड़े फैसले: घर बैठे होगा वेरिफिकेशन

SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग के 5 बड़े फैसले: अब घर बैठे होगा वेरिफिकेशन, दिल्ली-महाराष्ट्र में बढ़ी समयसीमा; आंतरिक मतभेदों की खबरों पर भी दी सफाई”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

देश भर में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रीविजन (SIR) को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच शनिवार को दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में चुनाव आयोग की एक उच्चस्तरीय बैठक हुई।

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार तथा दोनों चुनाव आयुक्तों—डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी—की मौजूदगी में हुई इस बैठक में आम मतदाताओं की शिकायतों को दूर करने और पूरी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए 5 महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं।

इसके साथ ही आयोग ने चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेदों से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स पर भी आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है।

आम मतदाताओं की सुविधा के लिए चुनाव आयोग के 5 बड़े फैसले:

  • 1. नोटिस पाने वालों को घर बैठे राहत: एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के तहत जिन मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं, उन्हें अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

  • बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) स्वयं मतदाताओं के घर जाकर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेंगे। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन सुनवाई की भी व्यवस्था की जाएगी।

  • 2. छूटे हुए और नए मतदाताओं को मौका: जिन नागरिकों के नाम मतदाता सूची से छूट गए हैं या जो नए युवा मतदाता (18 वर्ष पूर्ण कर चुके) हैं, वे निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) के पास आवेदन देकर इस विशेष अभियान के तहत अपना नाम सूची में जुड़वा सकेंगे।

  • 3. बेघर और कमजोर वर्गों के लिए विशेष कैंप: रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, प्रवासी मजदूरों और बेघर नागरिकों के सुगम मतदाता पंजीकरण के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) विशेष हेल्प डेस्क और शिविरों (कैंप) का आयोजन करेंगे।

  • 4. दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ी समयसीमा: आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां (Claims and Objections) दाखिल करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 30 अक्टूबर 2026 कर दिया है।

  • वहीं, इन आपत्तियों के निस्तारण के लिए महाराष्ट्र में 10 नवंबर और दिल्ली में 30 नवंबर तक की समयसीमा तय की गई है।

  • 5. गोवा में घर-घर जाकर लिए जाएंगे फॉर्म-6: गोवा में पुनरीक्षण की जांच के दौरान योग्य पाए गए जिन मतदाताओं के नाम सॉफ्टवेयर की तकनीकी समस्या के चलते अंतिम सूची में शामिल नहीं हो सके थे, वहां अब ब्लॉक स्तर के अधिकारी घर-घर जाकर ‘फॉर्म-6’ एकत्र करेंगे।

कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र और मतभेदों पर आयोग की सफाई

जिस ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट से यह पूरा विवाद शुरू हुआ था, चुनाव आयोग ने उस पर भी स्थिति स्पष्ट की है।

आयोग ने कहा है कि दोनों चुनाव आयुक्तों—डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी—द्वारा कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र एसआईआर (SIR) प्रक्रिया या चुनाव आयोग के किसी नीतिगत फैसले से संबंधित नहीं था।

आयोग के अनुसार, वह पत्र चुनाव पैनल में तैनात एक अधिकारी के कामकाज से जुड़े प्रशासनिक मामले को लेकर भेजा गया था, जिसे रिपोर्ट में एसआईआर से जोड़कर देखा गया।

आयोग ने यह भी दोहराया कि एक बहुसदस्यीय संस्था में कामकाज के दौरान अलग-अलग विचार आना एक सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया है।

विपक्ष का विरोध प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं

दूसरी ओर, एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने आक्रामक रुख अपना रखा है।

विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मनमानी करने और अन्य आयुक्तों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए देशव्यापी प्रदर्शन किए हैं और उन्हें पद से हटाने की मांग उठाई है।

इस पूरे प्रकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज है।