गोरखपुर में 28 करोड़ के जीएसटी नोटिस से परेशान पंचर की दुकान चलाने वाला राज प्रजापति

गोरखपुर: पंचर वाले पर 28 करोड़ का GST बकाया, फर्जी कंपनी का भंडाफोड़

गोरखपुर: पंचर बनाने वाले पर 28 करोड़ का GST बकाया, 100 करोड़ की फर्जी कंपनी का भंडाफोड़ “

गोरखपुर : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (GST) विभाग की टीम जब 100 करोड़ रुपये के टर्नओवर वाली एक कंपनी से 28 करोड़ रुपये का बकाया टैक्स वसूलने पहुंची, तो उनके होश उड़ गए।

जिस शख्स के नाम पर यह करोड़ों की कंपनी चल रही थी, वह असल में एक पंचर बनाने की दुकान चलाता है।

मामले की मुख्य बातें

  • बकाया टैक्स: 28 करोड़ रुपये

  • कथित टर्नओवर: 100 करोड़ रुपये

  • पीड़ित: राज प्रजापति (निवासी: रामपुर बुजुर्ग, एम्स थाना क्षेत्र)

  • फर्जी कंपनी का नाम: मेसर्स गढ़ प्राइवेट लिमिटेड टेक्सटाइल

कैसे हुआ यह बड़ा फर्जीवाड़ा?

जीएसटी विभाग को वर्ष 2025 में जानकारी मिली थी कि गोरखपुर की एक फर्म पर करोड़ों रुपये का टैक्स बकाया है।

नोटिस का जवाब न मिलने पर टीम शनिवार को फर्म के कथित मालिक राज प्रजापति के घर पहुंची। जब टीम ने राज की हालत और उसकी पंचर की दुकान देखी, तो पूरा माजरा उनकी समझ में आने लगा।

पूछताछ में राज ने बताया कि:

  1. कर्ज के नाम पर धोखा: साल 2024 में उसने अपनी बहन की शादी के लिए गांव के ही एक व्यक्ति से कर्ज लिया था।

  2. दस्तावेजों का दुरुपयोग: कर्ज देने वाले शख्स ने राज से उसका आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक पासबुक ले ली थी। साथ ही सादे कागज पर हस्ताक्षर करवाए और एक वीडियो भी बनाया था।

  3. फर्जी कंपनी का निर्माण: राज को लगा कि ये दस्तावेज सिर्फ कर्ज की औपचारिकता के लिए हैं। लेकिन आरोपी ने इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल करके ‘मेसर्स गढ़ प्राइवेट लिमिटेड टेक्सटाइल’ के नाम से एक फर्जी कंपनी खोल ली।

महत्वपूर्ण तथ्य: आरोपी शख्स करोड़ों रुपये का टर्नओवर दिखाकर और 28 करोड़ का जीएसटी बकाया छोड़कर कंपनी बंद कर चुका है और फिलहाल फरार है।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

विभाग

वर्तमान स्थिति

जीएसटी विभाग (GST)

टीम ने सच्चाई जानने के बाद राज को राहत दी है और मुख्य आरोपी की तलाश व आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गई है।

स्थानीय पुलिस

पीड़ित राज प्रजापति की तहरीर पर एम्स थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आरोपी की सरगर्मी से तलाश कर रही है।

 

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि किसी भी अनजान या गैर-भरोसेमंद व्यक्ति को अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज (जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि) सौंपना कितना खतरनाक साबित हो सकता है। फिलहाल पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है।