Punjab Chief Minister Bhagwant Mann and 78 Sikh MLAs appear before Akal Takht over Guru Granth Sahib Act 2026

पंजाब : अकाल तख्त पहुंचे पंजाब के 78 सिख विधायक

अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए पंजाब के 78 सिख विधायक, गुरु ग्रंथ साहिब कानून पर एक महीने में संशोधन का भरोसा”

अमृतसर : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

पंजाब की राजनीति और सिख धार्मिक परंपराओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में सोमवार को पंजाब विधानसभा के सभी 78 सिख विधायक अमृतसर स्थित अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए।

इनमें मुख्यमंत्री भगवंत मान, उनके सभी सिख कैबिनेट सहयोगी तथा विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान भी शामिल रहे।

यह धार्मिक सुनवाई ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट, 2026’ को लेकर सिख धर्मगुरुओं द्वारा जताई गई आपत्तियों के बाद आयोजित की गई।

बैठक के दौरान अकाल तख्त ने पंजाब सरकार को कानून में मौजूद विवादित प्रावधानों पर पुनर्विचार करने और औपचारिक आपत्तियों के आधार पर संशोधन करने के लिए एक महीने का समय दिया।

वहीं, उपस्थित विधायकों ने भी सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए कानून में आवश्यक बदलाव करने पर सहमति व्यक्त की।

क्या है पूरा मामला?

विवाद ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट, 2026’ को लेकर है। यह कानून वर्ष 2008 के मूल अधिनियम में संशोधन करता है, जिसका उद्देश्य सिखों के सर्वोच्च धार्मिक ग्रंथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी (अपमानजनक कृत्यों) को रोकना और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

इससे पहले भी वर्ष 2015 में शिरोमणि अकाली दल-भाजपा सरकार तथा 2018 में कांग्रेस सरकार ने बेअदबी के मामलों में कठोर सजा का कानून बनाने का प्रयास किया था, लेकिन केंद्र सरकार ने संवैधानिक और कानूनी कारणों का हवाला देते हुए इन प्रस्तावों को वापस भेज दिया था।

बाद में आम आदमी पार्टी सरकार ने वर्ष 2025 में नया विधेयक पेश किया, जिसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा गया और अंततः 2026 का संशोधित कानून लागू किया गया।

अकाल तख्त की आपत्ति क्या है?

अकाल तख्त ने स्पष्ट किया कि उसे बेअदबी के मामलों में कठोर सजा से कोई आपत्ति नहीं है। उसका मुख्य विरोध इस बात को लेकर है कि कानून बनाने से पहले अकाल तख्त, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और व्यापक सिख पंथ से कोई औपचारिक सलाह नहीं ली गई।

कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े किसी भी विषय पर निर्णय लेने का धार्मिक अधिकार अकाल तख्त का है।

उन्होंने कानून में धार्मिक शब्दावली को लेकर भी आपत्ति जताई। उनके अनुसार, अधिनियम में ‘बीर’ शब्द के स्थान पर ‘स्वरूप’ शब्द का प्रयोग किया गया है, जबकि इस प्रकार के धार्मिक विषयों पर विधानसभा निर्णय नहीं ले सकती।

सरकार पर धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप

ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने आरोप लगाया कि इस कानून के कई प्रावधान गुरु ग्रंथ साहिब, गुरुद्वारा प्रबंधन, ग्रंथियों, पाठियों, गुरुद्वारा कमेटियों और अन्य धार्मिक सेवादारों को भी कानूनी दायरे में ऐसे प्रस्तुत करते हैं जैसे वे संभावित आरोपी हों। उन्होंने इसे सिख धार्मिक मामलों में सरकार का सीधा हस्तक्षेप बताया।

अकाल तख्त सचिवालय के अनुसार, सभी सिख विधायकों और मंत्रियों को पहले ही आधिकारिक नोटिस जारी कर सुनवाई में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे।

क्या रहा सुनवाई का निष्कर्ष?

बैठक के अंत में पंजाब सरकार की ओर से मौजूद सभी सिख विधायकों ने सिख समुदाय की भावनाओं के अनुरूप कानून में आवश्यक संशोधन करने का भरोसा दिया।

अकाल तख्त ने सरकार को अपनी औपचारिक आपत्तियों पर कार्रवाई करने के लिए एक महीने का समय दिया है।

अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार निर्धारित समय सीमा के भीतर कानून में क्या बदलाव करती है और धार्मिक संस्थाओं की आपत्तियों का समाधान किस प्रकार करती है।