पंचायतों को मिलेगी वित्तीय स्वतंत्रता, राजस्व बढ़ाने पर जोर
आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम: ग्रामीण विकास की नई इबारत, पंचायतों को मिलेगा अपना राजस्व (OSR) बढ़ाने का मौका”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
देश की पंचायतों को अनुदानों पर निर्भरता से मुक्त कर उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने के लिए केंद्र सरकार ने ‘आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम’ लागू किया है।
12 अगस्त 2026 को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने इस महत्वाकांक्षी 4-वर्षीय पहल की विस्तृत जानकारी साझा की।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पंचायतों को अपनी अप्रयुक्त स्थानीय परिसंपत्तियों का उपयोग करके स्वयं का राजस्व (Own Source Revenue – OSR) उत्पन्न करने के लिए सशक्त बनाना है।
‘ओपन चैलेंज सिस्टम’ से होगा परियोजनाओं का चयन
इस योजना के तहत राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एक ‘ओपन चैलेंज सिस्टम’ आयोजित किया जा रहा है। इसके जरिए बेहतरीन राजस्व मॉडल पेश करने वाली पंचायतों का चयन किया जाएगा।
- लक्ष्य: प्रथम वर्ष में 50 परियोजनाएं और अगले तीन वर्षों में हर साल 100 परियोजनाएं विकसित की जाएंगी।
- पारदर्शिता: प्रस्ताव जमा करने से लेकर चयन तक की पूरी प्रक्रिया एक समर्पित डिजिटल पोर्टल के माध्यम से संचालित की जा रही है।
- प्रगति: 4 अगस्त 2026 तक इस पोर्टल पर केंद्र स्तर पर 28 पंचायतों से 30 परियोजना प्रस्ताव प्राप्त भी हो चुके हैं।
कौन सी पंचायतें ले सकती हैं भाग? (पात्रता शर्तें)
इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए पंचायतों को कुछ विशिष्ट शर्तें पूरी करनी होंगी:
- कार्यकाल: केवल वे निर्वाचित ग्राम और प्रखंड (Block) पंचायतें भाग ले सकती हैं, जिनका कम से कम 3 वर्ष का कार्यकाल शेष हो।
- राजस्व सीमा: ग्राम पंचायतों के लिए न्यूनतम ₹50 लाख और प्रखंड पंचायतों के लिए ₹1 करोड़ का स्वयं का राजस्व (OSR) स्तर निर्धारित है। (उत्तर-पूर्व और पहाड़ी राज्यों के लिए इन नियमों में छूट दी गई है)।
- सहभागिता: परियोजनाओं के लिए ग्राम सभा का अनिवार्य अनुमोदन आवश्यक है, ताकि सहभागी योजना-निर्माण सुनिश्चित हो सके।
सीधी फंडिंग नहीं, मिलेगी तकनीकी और ढांचागत मदद
आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम के तहत पंचायतों को प्रत्यक्ष नकद सहायता के बजाय तकनीकी सहायता दी जाती है।
- पंचायतों के प्रारंभिक विचारों को टिकाऊ और बैंक योग्य (Bankable) प्रोजेक्ट में बदला जाता है।
- फंडिंग के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) फंड, संस्थागत ऋण और सरकारी योजनाओं के अभिसरण (Convergence) के विकल्प तलाशे जाते हैं।
- राज्य स्तर पर मूल्यांकन समितियों में तकनीकी और वित्तीय परामर्श के लिए नाबार्ड (NABARD) और हुडको (HUDCO) जैसी प्रमुख वित्तीय संस्थाओं को शामिल किया जा सकता है।
16वें वित्त आयोग के विज़न के अनुरूप
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह कार्यक्रम सीधे तौर पर 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों से जुड़ा है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण स्थानीय निकायों को मिलने वाला ‘प्रदर्शन अनुदान’ उनके स्वयं के राजस्व (OSR) में होने वाली ठोस वृद्धि से जोड़ा जाना चाहिए।
यह कार्यक्रम पंचायतों को बैंक योग्य प्रोजेक्ट्स तैयार करने और पारदर्शी डिजिटल निगरानी के साथ वित्तीय रूप से स्वावलंबी बनने का एक शानदार ढांचा प्रदान करता है।











