बलूचिस्तान की आजादी: रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान की मान्यता की अपील
बलूचिस्तान की आजादी की मांग ने पकड़ा जोर: बलूच नेता ने की ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ की मान्यता की अपील, भारत का जताया आभार”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
सोशल मीडिया पर इन दिनों बलूचिस्तान के लोगों द्वारा अपनी आजादी का जश्न मनाते हुए ढेरों वीडियो वायरल हो रहे हैं। 11 अगस्त को बलूचिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाए जाने के बाद, बलूच अलगाववादी नेतृत्व ने अपने आंदोलन को एक नया राजनीतिक और कूटनीतिक मोड़ दे दिया है।
प्रमुख बलूच नेता मीर यार बलूच ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि “रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान” को एक स्वतंत्र देश के रूप में आधिकारिक मान्यता दी जाए।
भारत के रुख की सराहना और भारतीय मीडिया का आभार
बलूच नेता मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर जारी अपने संदेश में भारतीय मीडिया का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया है, जिसने 11 अगस्त के बलूच स्वतंत्रता दिवस को प्रमुखता से कवर किया।
- विदेश मंत्रालय के बयान का स्वागत: उन्होंने भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के उस बयान की भी खुलकर सराहना की, जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और अन्य क्षेत्रों में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की बात कही गई थी।
- हालांकि, भारत ने सीधे तौर पर बलूचिस्तान का नाम नहीं लिया था, लेकिन बलूच नेतृत्व इसे अपने आंदोलन के लिए एक बड़े कूटनीतिक और नैतिक समर्थन के रूप में देख रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मान्यता और कूटनीतिक अभियान
बलूच नेतृत्व अब अपनी लड़ाई को केवल पाकिस्तान की सीमाओं तक सीमित नहीं रखना चाहता। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ले जाने की तैयारी कर ली है:
- वैश्विक संस्थाओं से अपील: संयुक्त राष्ट्र (UN), आसियान (ASEAN), अफ्रीकी संघ, इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) और यूरोपीय देशों से बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के पक्ष में आवाज उठाने की अपील की गई है।
- भविष्य के राष्ट्र की रूपरेखा: बलूच समूहों का दावा है कि वे एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में विदेश नीति, रक्षा, अर्थव्यवस्था और कूटनीति का ढांचा तैयार कर रहे हैं।
- नई पहचान की तैयारी: इसके तहत अपना अलग पासपोर्ट, मुद्रा (Currency), मीडिया संस्थान और विदेशों में राजनयिक मिशन स्थापित करने का दावा किया गया है।
पाकिस्तान पर 50 हजार लोगों को यातना देने का आरोप
बलूच नेताओं ने पाकिस्तान सरकार और सेना पर अमानवीय दमन के गंभीर आरोप लगाए हैं।
- उनके अनुसार, वर्तमान में 50,000 से अधिक बलूच नागरिक पाकिस्तान के यातना केंद्रों में बंद हैं।
- जबरन गुमशुदगी, अवैध हिरासत और टारगेट किलिंग (लक्षित हत्याएं) आम बात हो गई है।
- 11 अगस्त के जश्न को रोकने के लिए पाकिस्तान ने मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी थीं। सैन्य छावनियों के आसपास खाइयां खोदी गईं और ड्रोन व हेलीकॉप्टर से निगरानी की गई।
रणनीतिक महत्व और 1947 का ऐतिहासिक दावा
बलूच नेतृत्व का ऐतिहासिक दावा है कि ब्रिटिश शासन के अंत के समय, भारत विभाजन से ठीक पहले 11 अगस्त 1947 को बलूचिस्तान ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की थी।
रणनीतिक दृष्टिकोण से, बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा (क्षेत्रफल के लिहाज से) और प्राकृतिक संसाधनों से सबसे समृद्ध प्रांत है।
बलूच नेताओं का कहना है कि एक स्वतंत्र बलूचिस्तान अपने संसाधनों के दम पर स्वास्थ्य, शिक्षा और मानवीय सहायता में बड़ा वैश्विक योगदान दे सकता है।
भारत के लिए भी यह घटनाक्रम भू-राजनीतिक रूप से अहम है। पाकिस्तान जो हमेशा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का झूठा नैरेटिव गढ़ने की कोशिश करता है,
उसे अब खुद के सबसे बड़े प्रांत में मानवाधिकार और आजादी के मोर्चे पर वैश्विक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।











