An illustration of parents and children dealing with school fees, books, and uniform expenses

निजी स्कूलों की मनमानी फीस और खरीदारी के दबाव पर सरकार सख्त

निजी स्कूलों की मनमानी फीस और खास दुकानों से खरीदारी के दबाव पर सरकार का स्पष्टीकरण, राज्यसभा में दी गई नियमों की जानकारी”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूलने और अभिभावकों पर किसी विशेष दुकान से ही किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बनाने की बढ़ती शिकायतों के बीच सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है।

राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी ने शिक्षा शुल्क के नियमन, राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट और उच्च शिक्षण संस्थानों से जुड़े नियमों की विस्तृत जानकारी सदन पटल पर रखी।

स्कूलों की फीस और राज्यों का अधिकार क्षेत्र

शिक्षा राज्य मंत्री ने बताया कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है। केंद्र सरकार द्वारा स्थापित या नियंत्रित स्कूलों को छोड़कर, अन्य सभी स्कूल (निजी स्कूलों सहित) राज्य सरकारों या केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

इसलिए, निजी स्कूलों की फीस का नियमन, अभिभावकों के हितों की रक्षा और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई करने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है।

आरटीई (RTE) एक्ट: मुफ्त शिक्षा और कैपिटेशन फीस पर रोक

केंद्र सरकार ने ‘बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009’ के तहत कई कड़े प्रावधान किए हैं:

  • 25% आरक्षण: आरटीई अधिनियम की धारा 12(1)(c) के तहत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में कमजोर वर्गों और वंचित समूहों के बच्चों के लिए प्रवेश स्तर (Entry Level) पर कम से कम 25% सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है।

  • मुफ्त शिक्षा: इन बच्चों को उनकी प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक मुफ्त शिक्षा दी जाएगी।

  • कैपिटेशन फीस पर प्रतिबंध: अधिनियम की धारा 13 किसी भी स्कूल द्वारा छात्रों से किसी भी प्रकार की कैपिटेशन फीस (डोनेशन/अतिरिक्त शुल्क) वसूलने पर पूरी तरह से रोक लगाती है।

सीबीएसई (CBSE) के सख्त नियम: वेंडरों की मोनोपोली पर लगाम

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अपने संबद्ध निजी स्कूलों के लिए सख्त उप-नियम बनाए हैं।

  • फीस में किसी भी प्रकार के बदलाव के लिए ‘स्कूल मैनेजमेंट कमेटी’ की स्पष्ट मंजूरी या राज्य सरकार की तय प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।

  • सीबीएसई ने स्कूलों को अभिभावकों का शोषण करने से रोकने के लिए कड़े निर्देश दिए हैं। कोई भी स्कूल अभिभावकों पर किसी विशेष वेंडर (दुकानदार) से ही किताबें, यूनिफॉर्म या स्टेशनरी खरीदने का दबाव नहीं डाल सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम करना है।

विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में फीस के नियम

  • डीम्ड विश्वविद्यालय: ये संस्थान यूजीसी (विश्वविद्यालय माने जाने वाले संस्थान) विनियम, 2023 द्वारा विनियमित होते हैं।

  • इसके तहत, संस्थानों को वैधानिक निकायों द्वारा निर्धारित फीस संरचना का पालन करना अनिवार्य है।

  • निजी विश्वविद्यालय: ये संस्थान संबंधित राज्य विधानमंडल के अधिनियम द्वारा स्थापित होते हैं। इनकी फीस और अन्य नियम पूरी तरह से संबंधित राज्य सरकार द्वारा बनाए गए प्रावधानों से संचालित होते हैं।

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