SP Chief Akhilesh Yadav holding a strategic meeting with Brahmin leaders for UP Assembly Election 2027

यूपी चुनाव 2027: अखिलेश का ब्राह्मण कार्ड, मायावती की OBC पर नजर

🗳️ यूपी चुनाव 2027: अखिलेश यादव ने चला ‘ब्राह्मण कार्ड’, मायावती की OBC वोट बैंक पर नजर, छिड़ी बड़ी सियासी जंग “

लखनऊ: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए अभी से सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। राज्य के दो बड़े क्षेत्रीय दलों— समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने सत्तारूढ़ भाजपा को घेरने के लिए अपने पारंपरिक समीकरणों से बाहर निकलकर नई जातियों को साधने का महा-अभियान शुरू कर दिया है।

जहां एक ओर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आज ब्राह्मण नेताओं की एक बेहद अहम आपात बैठक बुलाई है, वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने भी पार्टी के ओबीसी (OBC) नेताओं के साथ मैराथन मंथन किया है।

‘The Politics Again’ की इस विशेष राजनीतिक रिपोर्ट में आइए समझते हैं इस नए ‘जातीय कार्ड’ के पीछे का पूरा अंकगणित:

🤝 अखिलेश का ‘मिशन-2027’ रोडमैप: जुटे दिग्गज ब्राह्मण चेहरे

समाजवादी पार्टी अब केवल अपने पारंपरिक ‘मुस्लिम-यादव’ (M-Y) समीकरण तक सीमित नहीं रहना चाहती है।

बुधवार को अखिलेश यादव ने लखनऊ में पार्टी के वरिष्ठ ब्राह्मण नेताओं के साथ एक बड़ी बैठक की।

  • इन्हें मिला बुलावा: इस बैठक में सपा के मौजूदा व पूर्व विधायक, सांसद, पूर्व सांसद और प्रमुख ब्राह्मण चेहरे शामिल हुए।

  • बैठक का एजेंडा: बैठक का मुख्य उद्देश्य ब्राह्मण वोटरों को सपा के पाले में लाने की जमीनी रणनीति तैयार करना, पार्टी संगठन में उनकी भागीदारी बढ़ाना और सांगठनिक मजबूती तय करना है।

  • नाराजगी का फायदा उठाने की कोशिश: राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा से ब्राह्मण वोटरों के एक वर्ग की कथित नाराजगी की खबरों के बाद सपा खुद को उनका सबसे बड़ा हिमायती दिखाना चाहती है।

  • यही वजह है कि अखिलेश यादव अब अपने ‘PDA’ के ‘A’ को ‘अगड़ा’ शब्द से भी परिभाषित कर रहे हैं। उन्होंने शंकराचार्य विवाद में भी खुलकर संतों का समर्थन किया था।

🏛️ मायावती को याद आया 2007 का ‘सोशल इंजीनियरिंग’ फार्मूला

दूसरी तरफ, बसपा प्रमुख मायावती ने मंगलवार को लखनऊ में पार्टी के ओबीसी (OBC) नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की और कार्यकर्ताओं को 2027 से पहले अन्य पिछड़ा वर्गों का समर्थन जुटाने का कड़ा टास्क दिया।

  • इतिहास दोहराने की अपील: मायावती ने नेताओं को याद दिलाया कि कैसे साल 2007 के विधानसभा चुनावों में दलितों के साथ-साथ ओबीसी और अन्य जातियों के भारी समर्थन से बसपा ने अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी।

  • मायावती ने कहा कि 2027 के चुनावों में भी वैसा ही नतीजा दोहराने के लिए जमीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया जाए।

📊 यूपी की 100 सीटों पर ‘ब्राह्मण’ तय करते हैं जीत-हार का गणित

उत्तर प्रदेश के चुनावी रण में ब्राह्मण वोटर्स की भूमिका कितनी बड़ी है, इसे इन आंकड़ों से समझा जा सकता है:

विवरण

प्रभाव और आंकड़े

कुल आबादी में हिस्सेदारी

उत्तर प्रदेश में लगभग 10 से 12 फीसदी ब्राह्मण मतदाता हैं।

सीधा असर

राज्य की कुल 403 विधानसभा सीटों में से 100 से अधिक सीटों पर ब्राह्मण वोटर सीधे तौर पर प्रभावी हैं।

निर्णायक जिले

यूपी के 12 प्रमुख जिले ऐसे हैं जहां ब्राह्मण वोटर किसी भी प्रत्याशी की जीत या हार तय करने में पूरी तरह निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

 

भाजपा को 2027 में कड़ी चुनौती देने के लिए विपक्षी दलों के लिए इन अगड़ी और पिछड़ी जातियों को अपने पाले में लाना बेहद जरूरी माना जा रहा है।

अब देखना यह है कि अखिलेश यादव का यह ‘ब्राह्मण कार्ड’ और मायावती की ‘ओबीसी कूटनीति’ 2027 के रण में क्या रंग लाती है।

नोट: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के जातीय समीकरणों, अखिलेश यादव और मायावती की बैठकों के लाइव अपडेट्स के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।