जौनपुर के रोहित यादव ने भला फेक में रचा इतिहास
जौनपुर के रोहित यादव ने रचा इतिहास, 87.05 मीटर भाला फेंककर जीता गोल्ड; नीरज चोपड़ा को छोड़ा पीछे”
जौनपुर : द पॉलिटिक्स अगेन : अब्दुल हई राजा की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के मीरगंज क्षेत्र के अदारी डभिया गांव के युवा जैवलिन थ्रोअर रोहित यादव ने भारतीय एथलेटिक्स में नया इतिहास रच दिया है।
भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में आयोजित 65वीं नेशनल इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप के अंतिम दिन रोहित ने अपने आखिरी प्रयास में 87.05 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
इस शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने न केवल नया मीट रिकॉर्ड बनाया, बल्कि मौजूदा सीजन में भारत के नंबर-1 जैवलिन थ्रोअर भी बन गए।
रोहित की इस उपलब्धि से पूरे जौनपुर में खुशी की लहर दौड़ गई है। गांव में लोगों ने मिठाइयां बांटी और पटाखे फोड़कर इस ऐतिहासिक सफलता का जश्न मनाया।
आखिरी थ्रो में पलट दी बाजी
प्रतियोगिता के दौरान रोहित यादव ने लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया। उनकी थ्रो सीरीज इस प्रकार रही—
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77.71 मीटर
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77.63 मीटर
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नो मार्क
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77.51 मीटर
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79.40 मीटर
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87.05 मीटर
अंतिम प्रयास में किया गया 87.05 मीटर का थ्रो उन्हें स्वर्ण पदक दिलाने के साथ प्रतियोगिता का नया रिकॉर्ड भी बना गया।
नीरज चोपड़ा को छोड़ा पीछे
रोहित यादव का यह प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए बेहद खास माना जा रहा है।
मौजूदा वैश्विक प्रदर्शन सूची में—
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रुमेश थरंगा पाथिरागे (श्रीलंका) – 92.62 मीटर
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रोहित यादव (भारत) – 87.05 मीटर
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अन्य खिलाड़ियों के बाद
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नीरज चोपड़ा (भारत) – 85.69 मीटर
इस उपलब्धि के साथ रोहित इस सीजन में भारत के शीर्ष जैवलिन थ्रोअर बनकर उभरे हैं।
एशियाई खेल 2026 के लिए किया क्वालीफाई
87.05 मीटर के इस ऐतिहासिक थ्रो के साथ रोहित यादव ने नागोया (जापान) में होने वाले एशियाई खेल 2026 के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है।
उन्होंने वर्ष 2022 में बने 84.35 मीटर के मीट रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।
पिता से मिली खेल की प्रेरणा
रोहित यादव के पिता सभाजीत यादव स्वयं एक प्रतिष्ठित मैराथन धावक रहे हैं।
बचपन से खेल का माहौल मिलने के कारण रोहित ने एथलेटिक्स को अपना लक्ष्य बनाया और लगातार कठिन मेहनत के दम पर राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक का सफर तय किया।
जीत के बाद क्या बोले रोहित?
स्वर्ण पदक जीतने के बाद रोहित यादव ने कहा,
“अभ्यास के दौरान मैं लगातार 86 से 87 मीटर तक भाला फेंक रहा था, लेकिन प्रतियोगिता में वह प्रदर्शन नहीं कर पा रहा था। इससे मैं परेशान भी था। आज अंतिम प्रयास में सही तालमेल मिला और मैं अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन कर सका। अब राष्ट्रमंडल खेल और एशियाई खेलों के लिए मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है।”
गांव में जश्न का माहौल
रोहित यादव की सफलता की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव अदारी डभिया पहुंची, पूरे गांव में उत्सव का माहौल बन गया।
ग्रामीणों, खेल प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने मिठाइयां बांटी, पटाखे छोड़े और रोहित के परिवार को बधाई दी।
स्थानीय लोगों ने इसे जौनपुर के खेल इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताते हुए उम्मीद जताई कि रोहित आने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए पदक जीतेंगे।











