अब गांवों में भी बिना लाइसेंस नहीं बिकेगी खांसी की दवा
🚫छोटे गांवों में भी अब बिना लाइसेंस नहीं बिकेगी ‘खांसी की दवा’: स्वास्थ्य मंत्रालय ने बदला दशकों पुराना नियम, जानें क्या हुआ बदलाव?
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
जन स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए केंद्र सरकार ने एक बेहद अहम फैसला लिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने दशकों पुराने ‘औषधि नियम, 1945’ (Drugs Rules, 1945) में एक महत्वपूर्ण संशोधन किया है।
इस नए बदलाव के तहत अब देश के छोटे-से-छोटे गांवों में भी खांसी की दवा (Cough Syrups) बिना वैध लाइसेंस के नहीं बेची जा सकेगी।
‘The Politics Again’ की इस विशेष रिपोर्ट में आइए विस्तार से जानते हैं कि सरकार ने यह छूट क्यों वापस ली है और इसका आम जनता व दवा विक्रेताओं पर क्या असर पड़ेगा:
📜 क्या था पुराना नियम और अब क्या बदला?
औषधि नियम, 1945 की ‘अनुसूची के’ (Schedule K) के अंतर्गत विशिष्ट प्रकार की औषधियों को लाइसेंस नियमों से छूट प्राप्त थी।
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इस संशोधन से पहले, अनुसूची ‘के’ के तहत 1,000 से कम जनसंख्या वाले गांवों में खांसी की दवाइयों की बिक्री के लिए ‘खुदरा बिक्री लाइसेंस’ (Retail Sale License) होना अनिवार्य नहीं था। यानी कोई भी छोटी दुकान इन्हें बेच सकती थी।
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लेकिन, अब स्वास्थ्य मंत्रालय ने राजपत्र अधिसूचना (GSR 927 E) के माध्यम से अनुसूची के से “सीरप” (Syrup) शब्द को पूरी तरह से हटा दिया है।
🏥 अब केवल ‘लाइसेंस प्राप्त’ फार्मेसियों से ही मिलेगी दवा
इस अहम शब्द को हटाए जाने का सीधा असर यह होगा कि खांसी की दवाइयों (कफ सीरप) पर मिलने वाली दशकों पुरानी यह छूट अब खत्म हो गई है।
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परिणामस्वरूप, छोटे गांवों और ग्रामीण इलाकों में भी अब खांसी की दवाइयों की बिक्री और वितरण केवल उन्हीं मेडिकल स्टोरों या फार्मेसियों के माध्यम से किया जा सकेगा, जिनके पास ‘औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940’ के तहत विधिवत रूप से लाइसेंस मौजूद है।
🛡️ क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
सरकार ने यह कदम सीरप बनाने और बेचने की प्रक्रिया पर नियामक निगरानी (Regulatory Oversight) को मजबूत करने के लिए उठाया है।
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अक्सर बिना लाइसेंस वाली दुकानों से खांसी की दवाइयों के गलत इस्तेमाल या गुणवत्ता की कमी के मामले सामने आते रहे हैं।
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छूट के प्रारूप को आज के आधुनिक जन स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों के अनुरूप बनाने के लिए यह संशोधन बेहद जरूरी था।
मंत्रालय को उम्मीद है कि इस कड़े उपाय से पूरे देश में खांसी की दवाइयों के ‘जिम्मेदार वितरण’ को बढ़ावा मिलेगा और गुणवत्ता मानकों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित हो सकेगा।
इसके साथ ही, स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को सख्त सलाह दी है कि वे लागू लाइसेंसिंग नियमों का कड़ाई से पालन करें, अन्यथा उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
नोट: स्वास्थ्य मंत्रालय के नए नियमों, मेडिकल गाइडलाइंस और देश की हर जरूरी प्रशासनिक खबर के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।











