योग और भारतीय दर्शन

योग और भारतीय दर्शन: विश्व को निरोग और तनावमुक्त बनाने का मार्ग

योग और भारतीय दर्शन: विश्व को निरोग, संतुलित और तनावमुक्त बनाने का एकमात्र मार्ग”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

योग (Yoga) केवल शारीरिक व्यायाम का नाम नहीं है, बल्कि यह जीवन को संतुलित और अनुशासित बनाने का एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है।

भगवान श्रीकृष्ण ने भी योग को मन को संतुलित करने का सबसे सशक्त माध्यम बताया है। सनातन काल से यह सर्वसिद्ध है कि व्यवस्थित योग क्रियाओं के जरिए न केवल शरीर को निरोग रखा जा सकता है, बल्कि मानसिक शांति भी प्राप्त की जा सकती है।

आधुनिक जीवनशैली और मानसिक अवसाद का बढ़ता खतरा

आजकल की भागदौड़ भरी दिनचर्या में अधिकतर लोग तनाव (Stress) और अवसाद (Depression) का शिकार हो रहे हैं।

यह मानसिक अवसाद व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में सबसे बड़ा अवरोध है। इन सभी समस्याओं का एकमात्र समाधान योग है।

योग से हमारी एकाग्रता बढ़ती है, कार्यक्षमता में सुधार होता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) मजबूत होती है।

इसलिए, आज ही से योग को अपने जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनाना बेहद जरूरी है।

भारतीय दर्शन और विश्व का कल्याण

भारत में ज्ञान और विज्ञान की पराकाष्ठा युगों पूर्व स्थापित हो चुकी थी। भारत ने हमेशा से विश्व को ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ (पूरा विश्व एक परिवार है) और ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:’ (सभी सुखी रहें) का संदेश दिया है।

आज जब दुनिया के कई देश केवल अपने स्वार्थ के लिए दूसरों के हितों पर चोट कर रहे हैं और वैचारिक अशांति फैला रहे हैं, तब भारत का यह दर्शन दुनिया को शांति का मार्ग दिखा रहा है।

योग के नियमित अभ्यास से मिलने वाले प्रमुख लाभ:

लाभ का क्षेत्र

योग का प्रभाव

शारीरिक स्वास्थ्य

शरीर पुष्ट होता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और ऊर्जा का संचार होता है।

मानसिक स्वास्थ्य

तनाव और अवसाद दूर होता है, एकाग्रता बढ़ती है और विचारों में शुद्धता आती है।

आध्यात्मिक विकास

‘स्व’ का बोध होता है, ध्यान से मन शांत रहता है और जीवन में सकारात्मकता आती है।

 

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: भारत की सकारात्मक वैश्विक पहल

21 जून को मनाया जाने वाला ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ (International Yoga Day) भारत की एक ऐसी सकारात्मक पहल है, जिसने पूरी दुनिया को एक मंच पर ला खड़ा किया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, भारत की इस ‘विराट शक्ति’ का अहसास आज पूरे विश्व को हो चुका है।

विदेशी चकाचौंध में हम भले ही कुछ समय के लिए अपनी प्राचीन शक्तियों को भूल गए थे, लेकिन अब भारत फिर से विश्व के समक्ष एक आदर्श के रूप में स्थापित हो रहा है।

योग वास्तव में सक्रियता और शांति की कुंजी है। यदि विश्व को सुख और समृद्धि के मार्ग पर ले जाना है, तो भारत के इस योग दर्शन को पूरी तरह अपनाना ही होगा।