विश्व औषध संहिता बैठक 2026: ब्राजील में IPC ने किया भारत का प्रतिनिधित्व
ब्राजील में गूंजा भारत का डंका: 16वीं अंतर्राष्ट्रीय औषध संहिता बैठक में IPC ने किया देश का शानदार प्रतिनिधित्व “
नई दिल्ली/ब्रासीलिया: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
वैश्विक स्तर पर दवाओं की गुणवत्ता और मानकों को तय करने में भारत का दबदबा लगातार बढ़ रहा है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्यरत ‘भारतीय औषध संहिता आयोग’ (IPC) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने ब्राजील के ब्रासीलिया में 15 से 17 जून 2026 के बीच आयोजित विश्व औषध संहिताओं की 16वीं अंतर्राष्ट्रीय बैठक (IMWP) में देश का प्रतिनिधित्व किया।
इस अहम बैठक में IPC प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व आयोग के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलाइसेल्वन ने किया। उनके साथ डॉ. पवन सैनी और डॉ. श्रुति रस्तोगी भी इस वैश्विक मंच पर मौजूद रहे।
WHO के सहयोग से जुटे दुनिया भर के प्रमुख आयोग
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में दुनिया भर की प्रमुख औषध संहिताओं के प्रतिनिधियों ने एक मंच पर अपने विचार साझा किए।
इसमें भारत (IPC) के अलावा ब्राजील, यूरोप, जापान, दक्षिण कोरिया, मेक्सिको, रूस, यूनाइटेड किंगडम (BP), संयुक्त राज्य अमेरिका (USP), उज्बेकिस्तान, वियतनाम और WHO की अंतर्राष्ट्रीय फार्माकोपिया के प्रतिनिधि शामिल हुए।
वैश्विक मानकों के समकक्ष हैं भारतीय मानक
बैठक के दौरान डॉ. वी. कलाइसेल्वन ने ‘भारतीय औषध संहिता’ पर एक विस्तृत और प्रभावशाली प्रस्तुति दी।
उन्होंने भारत में औषधि गुणवत्ता मानकों के आधुनिकीकरण और वैश्विक सामंजस्य में देश के योगदान को रेखांकित किया।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने इस बात पर मुहर लगाई कि भारतीय औषध संहिता के मानक आज अग्रणी वैश्विक संहिताओं के बिल्कुल समकक्ष हैं।
सम्मेलन में इन जटिल औषधीय अणुओं के गुणवत्ता मानकों के विकास में भारत के नेतृत्व की विशेष सराहना की गई:
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तपेदिक रोधी (Anti-TB) दवाएं
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कैंसर रोधी दवाएं
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रक्त और रक्त उत्पाद (Blood Products)
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एनीमिया में प्रयुक्त होने वाली जीवनरक्षक दवाएं
भविष्य की रणनीति और जन स्वास्थ्य में भारत की भूमिका
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने बैठक में आधुनिक सूक्ष्मजीव विज्ञान तकनीकों, औषध संहिताओं के अभिसरण और पर्यावरणीय स्थिरता (Environmental Sustainability) जैसे ज्वलंत विषयों पर सक्रिय भागीदारी निभाई।
डॉ. कलाइसेल्वन ने स्पष्ट किया कि भारत विज्ञान-आधारित मानकों और सख्त नियामक सहयोग के माध्यम से दुनिया भर में जन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस सम्मेलन ने न केवल वैश्विक औषध संहिताओं के साथ भारत के सहयोग को नई मजबूती दी है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि भारत अब दवाओं की गुणवत्ता तय करने में ‘विश्व गुरु’ की भूमिका निभा रहा है।











