World Bank SAPLING Food Systems South Asia

विश्व बैंक: खाद्य प्रसंस्करण से दक्षिण एशिया में पैदा होंगे करोड़ों रोजगार

खाद्य प्रणालियों में बदलाव से दक्षिण एशिया में खड़े होंगे करोड़ों रोजगार और अरबों डॉलर के निवेश: विश्व बैंक का बड़ा दावा “

अहमदाबाद/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

दक्षिण एशिया इस समय अपने विकास के एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहां हर साल लाखों युवा वर्कफोर्स (कार्यबल) में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में स्थायी रोजगार का सृजन करना इस पूरे क्षेत्र की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है।

‘The Politics Again’ की बिजनेस और इकोनॉमी डेस्क के अनुसार, गुजरात के अहमदाबाद में शुरू हुए दो दिवसीय उच्च स्तरीय क्षेत्रीय नीति संवाद ‘सैपलिंग’ (SAPLING) में विश्व बैंक समूह (World Bank Group) ने एक बड़ा दावा किया है।

विश्व बैंक के अनुसार, यदि दक्षिण एशियाई देश केवल फसल उत्पादन तक सीमित न रहकर अपनी पूरी ‘खाद्य प्रणाली’ (Food System) में बदलाव लाएं, तो यह क्षेत्र करोड़ों नए उत्पादक रोजगार और अरबों डॉलर के निवेश के अवसरों को अनलॉक कर सकता है।

📊 दक्षिण एशिया का कृषि विरोधाभास और खाद्य बर्बादी

विश्व बैंक की रिपोर्ट इस क्षेत्र की कृषि व्यवस्था में मौजूद एक बड़े अंतर और चिंताजनक आंकड़ों को उजागर करती है:

क्षेत्र

आंकड़े और जमीनी हकीकत

कृषि का वार्षिक मूल्य

$700 अरब डॉलर से अधिक

रोजगार निर्भरता

लगभग 43% कार्यबल सीधे कृषि से जुड़ा है

GDP में योगदान

विशाल आकार के बावजूद, जीडीपी में योगदान केवल 16% है

खाद्य सामग्री की बर्बादी

उत्पादित भोजन का 30% से अधिक हिस्सा हर साल बर्बाद हो जाता है (यह 30 करोड़ लोगों का पेट भरने के लिए काफी है)

 

बदलाव का अगला चरण:

विशेषज्ञों का मानना है कि अब कृषि परिवर्तन का अगला चरण केवल पैदावार बढ़ाना नहीं है। असली प्रगति खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing), सुरक्षित भंडारण (Cold Chain), लॉजिस्टिक्स, मार्केटिंग और मूल्यवर्धन (Value Addition) का विस्तार करने में है। इससे खाद्य सामग्री का नुकसान कम होगा और किसानों की आय सीधे दोगुनी हो जाएगी।

🇮🇳 भारतीय खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की सफलता: एक वैश्विक केस स्टडी

इस संवाद में भारत के नीतिगत हस्तक्षेपों और प्रगति की जमकर सराहना की गई। भारत का अनुभव दर्शाता है कि कैसे सही नीतियां पूरी वैल्यू चेन को बदल सकती हैं:

  • उत्पादन में ऐतिहासिक उछाल: भारत में खाद्यान्न उत्पादन साल 1950-51 के 51 मिलियन टन से बढ़कर आज 330 मिलियन टन से अधिक हो चुका है।

  • निर्यात में दोगुनी वृद्धि: पिछले एक दशक में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों (Processed Foods) का निर्यात दोगुने से अधिक होकर 4.9 अरब डॉलर से बढ़कर 10 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है।

  • जीडीपी और विनिर्माण में योगदान: खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र वर्तमान में भारत के विनिर्माण मूल्यवर्धन (Manufacturing Value-Add) में लगभग 9% और कुल निर्यात में लगभग 13% का योगदान दे रहा है।

मोदी सरकार की 3 गेम-चेंजर योजनाएं:

भारत में इस क्रांति को गति देने का श्रेय सरकार की तीन प्रमुख योजनाओं को दिया गया, जिन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर निवेश को आकर्षित किया है:

  1. प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना

  2. PMFME योजना (प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों का औपचारिकरण)

  3. PLI योजना (खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन)

🚀 भविष्य की राह: ‘AgriConnect’ और ‘SAPLING’ का संयुक्त विजन

इस बदलाव को वैश्विक स्तर पर गति देने के लिए विश्व बैंक समूह दो प्रमुख क्षेत्रीय मंचों के माध्यम से सरकारों, निवेशकों और स्टार्टअप्स को एक साथ ला रहा है:

  • एग्रीकनेक्ट (AgriConnect): यह एक वैश्विक मंच है जिसका लक्ष्य बुनियादी ढांचे में सुधार और निजी पूंजी जुटाकर साल 2030 तक 3 करोड़ किसानों को सीधे बाजारों से जोड़ना है। यह पहल भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका में पहले से सक्रिय है।

  • सैपलिंग (SAPLING): ‘दक्षिण एशियाई नीति नेतृत्व बेहतर पोषण और विकास’ (SAPLING) एक क्षेत्रीय मंच है, जो नीतिगत सुधारों को लागू करने और पूरे दक्षिण एशिया में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने का काम कर रहा है।

अहमदाबाद में भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस दो दिवसीय संवाद में नीति निर्माताओं, उद्योगपतियों और स्टार्टअप्स सहित लगभग 200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इसमें साफ किया गया कि दक्षिण एशिया का आर्थिक भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वह कितनी जल्दी अपने कोल्ड चेन, वेयरहाउसिंग, और डिजिटल ट्रैसबिलिटी तकनीकों को अपग्रेड करता है।