सऊदी अरब के मदीना में मिला 11 करोड़ टन यूरेनियम का विशाल भंडार
सऊदी अरब में मिला 11 करोड़ टन यूरेनियम और दुर्लभ खनिजों का भंडार, ‘विजन 2030’ और क्षेत्रीय कूटनीति में हलचल”
रियाद: संतोष सेठ, संपादक (THE POLITICS AGAIN)
मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव और सैन्य संघर्षों के बीच, सऊदी अरब ने एक ऐसी खोज की घोषणा की है जो वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय भू-राजनीति की दिशा बदल सकती है।
सऊदी अरब ने इस्लाम के पवित्र शहर मदीना के जबल सईद क्षेत्र में लगभग 11 करोड़ टन कच्चे अयस्क का विशाल भंडार मिलने का दावा किया है।
इस भंडार में भारी दुर्लभ मृदा तत्वों (Rare Earth Elements) के साथ-साथ यूरेनियम (Uranium) की उत्साहजनक मात्रा पाई गई है।
ऊर्जा मंत्री ने की पुष्टि सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने सोमवार को मीडिया रिपोर्टों में इसकी पुष्टि की।
उन्होंने बताया कि जबल सईद परियोजना में किए गए सघन खनन और भूगर्भीय अध्ययनों से इस विशाल अयस्क संसाधन का पता चला है।
यूरेनियम और दुर्लभ खनिजों की मौजूदगी वाला यह भंडार सऊदी अरब के लिए ऊर्जा और खनिज क्षेत्र में रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
‘विजन 2030’ और परमाणु ऊर्जा की महत्वाकांक्षा
दुनिया की सबसे बड़ी अरब अर्थव्यवस्था सऊदी अरब, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के महत्वाकांक्षी ‘विजन 2030’ के तहत अपनी अर्थव्यवस्था को केवल कच्चे तेल पर निर्भरता से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है।
यूरेनियम की यह खोज घरेलू स्तर पर इसके निष्कर्षण और नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को तेज गति प्रदान करेगी।
अमेरिका के साथ समझौते और यूरेनियम संवर्धन
यह खोज इसलिए भी और महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि हाल ही में (जुलाई में) अमेरिका और सऊदी अरब के बीच नागरिक परमाणु कार्यक्रम विकसित करने और एक द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं।
इस समझौते के तहत अमेरिकी कंपनियां सऊदी अरब के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में मदद करेंगी। सबसे अहम बात यह है कि इस समझौते से सऊदी अरब को अपनी जमीन पर बिना अमेरिकी निगरानी के ‘यूरेनियम संवर्धन’ का विकल्प मिल सकता है, जिससे उसकी रणनीतिक स्वायत्तता काफी बढ़ जाएगी।
मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन और ईरान से तनाव
यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब मध्य पूर्व (खासकर गाजा और लेबनान) युद्ध की आग में सुलग रहा है।
सुन्नी शक्ति का प्रमुख केंद्र सऊदी अरब लंबे समय से शिया बहुल ईरान के साथ रणनीतिक वर्चस्व की होड़ में है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम पहले से ही अमेरिका और इजरायल के निशाने पर है।
यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में फैलाई जा रही अशांति के बीच, सऊदी अरब में यूरेनियम की यह खोज उसे आर्थिक और सैन्य रूप से और भी अधिक शक्तिशाली व रणनीतिक बढ़त प्रदान कर सकती है।










