CSIR-NIScPR की पहल: ‘सरल AI’ से आम लोगों तक पहुंचेगा वैज्ञानिक शोध
CSIR-NIScPR की नई पहल: ‘सरल AI’ के जरिए अब आम लोगों की भाषा में पहुंचेगा जटिल वैज्ञानिक अनुसंधान”
नई दिल्ली: संतोष सेठ, संपादक (THE POLITICS AGAIN)
जटिल वैज्ञानिक अनुसंधानों और शोध पत्रों को आम लोगों की पहुंच और समझ में लाने के लिए सरकार ने एक बड़ी और अभिनव पहल की है।
सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NIScPR) ने विज्ञान संचार को मजबूत और सुलभ बनाने के लिए ‘सरल एआई’ (Saral AI) तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
यह पहल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के उस आह्वान के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने संस्थानों से उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने की अपील की थी।
‘सरल AI’ का मुख्य उद्देश्य और कार्यप्रणाली
अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF), नई दिल्ली द्वारा शुरू की गई ‘सरल एआई’ पहल का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक पत्रिकाओं (Journals) में प्रकाशित जटिल शोध पत्रों को आकर्षक, लघु और आसानी से समझ में आने वाले वीडियो में बदलना है।
ANRF के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन ने हाल ही में NIScPR के दौरे के दौरान इस तकनीक की जानकारी दी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि “अनुसंधान केवल प्रकाशन (Publication) के साथ समाप्त नहीं होना चाहिए।”
सरल एआई जैसे उपकरण शोधकर्ताओं को अपने काम को आम लोगों तक पहुंचाने और भारतीय अनुसंधान का सामाजिक प्रभाव बढ़ाने में सीधे तौर पर मदद करेंगे।
संस्थान की सक्रियता और डिजिटल पहुंच
CSIR-NIScPR की निदेशक डॉ. गीता वाणी रायसम के नेतृत्व में संस्थान इस तकनीक को अपनाने वाला अग्रणी संगठन बन गया है।
हाल ही में संस्थान ने पत्रिकाओं के संपादकों और शोधकर्ताओं के लिए ‘सरल एआई’ पर एक व्यावहारिक कार्यशाला का भी आयोजन किया, जिसमें 90 से अधिक लोगों ने भाग लिया।
डॉ. गीता वाणी रायसम ने कहा कि “वैज्ञानिक ज्ञान का महत्व तभी है जब वह शोध समुदाय से बाहर निकलकर आम लोगों तक पहुंचे।”
इस पहल के तहत तैयार किए जा रहे ये ज्ञानवर्धक लघु वीडियो छात्रों और आम जनता के लिए एक समर्पित यूट्यूब प्लेलिस्ट (https://www.youtube.com/playlist?list=PLb4FmdATtzOs) के माध्यम से उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि विज्ञान हर घर तक आसानी से पहुंच सके।










