PM Narendra Modi sharing a Sanskrit Subhashitam emphasizing harmony and mutual understanding

पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्, देश को दिया सद्भाव का संदेश

पीएम मोदी ने साझा किया ‘संस्कृत सुभाषितम्’, देशवासियों से की आपसी स्नेह, सद्भाव और घृणा-मुक्त समाज की अपील”

नई दिल्ली: संतोष सेठ, संपादक (THE POLITICS AGAIN)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों के बीच आपसी स्नेह, सद्भाव और समझ को बढ़ावा देने के लिए एक शाश्वत संदेश दिया है।

 

मंगलवार (15 सितंबर 2026) को प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक प्राचीन ‘संस्कृत सुभाषितम्’ साझा किया, जो भारतीय संस्कृति के मूल मूल्यों— प्रेम, कोमलता और एकजुटता पर प्रकाश डालता है।

क्या है वह संस्कृत सुभाषितम्?

प्रधानमंत्री ने अपने पोस्ट में अथर्ववेद के इस अत्यंत महत्वपूर्ण श्लोक का उल्लेख किया:

“सहृदयं सांमनस्यमविद्वेषं कृणोमि वः। अन्यो अन्यमभि हर्यत वत्सं जातमिवाघ्न्या॥”

श्लोक का अर्थ और प्रधानमंत्री का संदेश

पीआईबी (PIB) दिल्ली द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, इस सुभाषितम् के माध्यम से प्रधानमंत्री ने लोगों से घृणा और द्वेष से मुक्त होकर ‘समान हृदय’ और ‘साझा दिमाग’ (एकजुट सोच) विकसित करने का आह्वान किया है।

इस श्लोक में स्पष्ट संदेश छिपा है कि समाज के सभी लोगों को परस्पर एक-दूसरे की देखभाल और प्रेम उसी निस्वार्थ स्नेह और कोमलता के साथ करना चाहिए, जिस प्रकार एक गाय अपने नवजात बछड़े का पालन-पोषण करती है।

प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश मौजूदा वैश्विक और सामाजिक परिदृश्य में अत्यंत प्रासंगिक है, जो भारत की सनातन परंपराओं और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (पूरी दुनिया एक परिवार है) की भावना को और भी अधिक मजबूती प्रदान करता है।

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