US Space Force satellite and space control weapons orbiting Earth defending against hostile actions

अमेरिका का बड़ा खुलासा: अंतरिक्ष में तैनात किए घातक ‘स्पेस कंट्रोल’ हथियार

अमेरिका की खुली स्वीकारोक्ति: अंतरिक्ष में तैनात किए घातक हथियार, ‘स्पेस वॉर’ की आहट से बढ़ी दुनिया की धड़कनें”

वाशिंगटन: संतोष सेठ, संपादक (THE POLITICS AGAIN)

दुनिया भर में धरती पर चल रहे युद्धों के बीच अब ‘स्पेस वॉर’ (अंतरिक्ष युद्ध) का खतरा भी मंडराने लगा है।

अमेरिका ने पहली बार स्पष्ट रूप से यह स्वीकार किया है कि उसने अंतरिक्ष की कक्षा (Orbit) में सैन्य क्षमताएं और हथियार तैनात कर रखे हैं।

अमेरिकी स्पेस फोर्स ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर पुष्टि करते हुए कहा कि ये क्षमताएं कक्षा में पहले से ही मौजूद हैं

साथ ही जरूरत पड़ने पर किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।

‘स्पेस कंट्रोल’ हथियार: रक्षा और आक्रामक दोनों के लिए तैयार

अमेरिकी स्पेस फोर्स के प्रवक्ता ने खुलासा किया है कि अमेरिका के पास अंतरिक्ष में “ऑन-ऑर्बिट स्पेस कंट्रोल हथियार” मौजूद हैं।

इन प्रणालियों का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष में मौजूद अमेरिकी संपत्तियों और संयुक्त बलों की रक्षा करना है।

स्पेस फोर्स के अनुसार, ‘स्पेस कंट्रोल’ के तहत ऐसे अभियान चलाए जा सकते हैं जो अंतरिक्ष क्षेत्र में किसी भी विरोधी की क्षमताओं को चुनौती दें।

इसके लिए काइनेटिक (भौतिक रूप से नष्ट करने वाले) और नॉन-काइनेटिक (जैसे जैमिंग या साइबर अटैक), दोनों तरह के उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

फोर्स ने यह भी साफ किया है कि इन हथियारों का प्रयोग केवल रक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर आक्रामक (Offensive) उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है।

चीन और रूस से मिल रही है कड़ी चुनौती

अंतरिक्ष में वर्चस्व की यह होड़ अमेरिका, चीन और रूस की बढ़ती सैन्य महत्वाकांक्षाओं का परिणाम है।

अमेरिका, चीन और रूस दोनों को ही अंतरिक्ष में अपने रणनीतिक हितों के लिए एक बड़े खतरे के रूप में देखता है।

अमेरिकी स्पेस फोर्स के अनुसार, चीन अपनी सैन्य आधुनिकीकरण रणनीति के तहत तेजी से ‘काउंटरस्पेस’ (अंतरिक्ष-रोधी) क्षमताएं विकसित कर रहा है।

वहीं, रूस भी अंतरिक्ष को भविष्य के युद्धों का एक अहम और निर्णायक क्षेत्र मानता है।

अंतरिक्ष का सैन्यीकरण और 1967 की संधि

अंतरिक्ष के सैन्यीकरण की शुरुआत 1957 में सोवियत संघ के ‘स्पुतनिक’ उपग्रह के प्रक्षेपण के साथ ही हो गई थी। तब से उपग्रहों को हथियारों से लैस करने और उन्हें नष्ट करने (Anti-Satellite) की तकनीकों पर काम हो रहा है।

हालांकि 1967 की ‘आउटर स्पेस ट्रीटी’ (बाह्य अंतरिक्ष संधि) के तहत अंतरिक्ष में परमाणु या सामूहिक विनाश के हथियार (WMD) तैनात करने पर रोक है,

लेकिन कई अन्य सैन्य अभियान और उपग्रहों को निशाना बनाने वाली तकनीकें इस संधि के दायरे में प्रतिबंधित नहीं हैं।

सैन्य संचार, निगरानी और नेविगेशन पूरी तरह से उपग्रहों पर निर्भर हैं। ऐसे में अमेरिका की यह स्वीकारोक्ति भविष्य के किसी भी वैश्विक संघर्ष में अंतरिक्ष के एक प्रमुख ‘वॉर जोन’ में बदलने का स्पष्ट संकेत है।