Wind turbines representing India's growing wind energy sector and renewable energy goals on World Wind Day

विश्व वायु दिवस: पवन ऊर्जा हब बनेगा भारत, सम्मेलन आज

🌬️ विश्व वायु दिवस 2026: गोवा में महा-सम्मेलन आज, ‘पवन ऊर्जा’ में ग्लोबल लीडर बनने की ओर भारत के मजबूत कदम “

पणजी/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती से निपटने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर साल 15 जून को ‘विश्व वायु दिवस’ (World Wind Day) मनाया जाता है।

इस अवसर पर भारत आज (15 जून 2026) गोवा में एक विशाल सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जिसकी थीम “विंड एनर्जी: एम्बिशन टू एक्सेलरेशन” (Wind Energy: Ambition to Acceleration) रखी गई है।

‘The Politics Again’ की इस विशेष रिपोर्ट में आइए जानते हैं इस महा-सम्मेलन के मायने, भारत का पवन ऊर्जा परिदृश्य और सरकार की भविष्य की रणनीतियां:

🤝 गोवा सम्मेलन: क्या होगा खास?

इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन में सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA), सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (SECI), इरेडा (IREDA), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ विंड एनर्जी (NIWE) और ग्रिड इंडिया सहित कई राज्य सरकारों और उद्योग जगत के दिग्गज शामिल हो रहे हैं।

  • प्राथमिकताएं: इस दौरान देश के पवन ऊर्जा क्षेत्र के अगले चरण को आकार देने पर चर्चा होगी। इसमें ग्रिड की तैयारी, घरेलू उत्पादन, निर्यात के अवसर और संसाधन क्षमता पर जोर दिया जाएगा।

  • रिपोर्ट होगी लॉन्च: सम्मेलन में इंडस्ट्री की एक अहम रिपोर्ट “एलिवेटिंग इंडियाज विंड टर्बाइन एक्सपोर्ट फॉर ग्लोबल मार्केट्स” भी जारी की जाएगी।

📈 भारत का पवन ऊर्जा परिदृश्य: एक नजर में

भारत का पवन ऊर्जा (Wind Energy) क्षेत्र लगातार तेज रफ्तार से बढ़ रहा है। देश का बड़ा पवन संसाधन बेस 2030 तक 100 GW और 2036 तक 156 GW पवन क्षमता हासिल करने का मजबूत आधार तैयार कर रहा है।

पवन संसाधन क्षमता वाले शीर्ष राज्य (150 मीटर की ऊंचाई पर):

राज्य

अनुमानित क्षमता (GW में)

राजस्थान

284.2

गुजरात

180.8

महाराष्ट्र

173.9

कर्नाटक

169.3

आंध्र प्रदेश

123.3

(देश भर में पवन ऊर्जा की क्षमता को मापने के लिए 900 से ज्यादा विंड-मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं।)

🚀 उत्पादन और क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि

  • वैश्विक रैंकिंग: स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत दुनिया भर में चौथे नंबर पर है।

  • 2.66 गुना की वृद्धि: मार्च 2014 में देश की पवन ऊर्जा क्षमता 21.04 GW थी, जो मार्च 2026 में बढ़कर 56.09 GW हो गई है। वर्तमान में 28 GW क्षमता पर काम चल रहा है।

  • नया रिकॉर्ड: भारत ने 2025-26 में अपनी अब तक की सबसे ज्यादा सालाना क्षमता (6.05 GW) जोड़ी है।

  • स्वदेशीकरण: विंड टर्बाइन उत्पादन क्षेत्र ने ब्लेड, टावर और गियरबॉक्स जैसे जरूरी उपकरणों में 70-80% तक स्वदेशीकरण हासिल कर लिया है।

🏛️ ‘पवन क्रांति’ के लिए सरकार की प्रमुख पहलें

केंद्र सरकार पवन ऊर्जा के ऑफशोर (समुद्री तटों से दूर) विकास और ग्रिड आधुनिकीकरण पर भारी निवेश कर रही है:

  1. ₹6,853 करोड़ का भारी निवेश: गुजरात और तमिलनाडु के तटों पर 1,000 MW (500-500 MW) के ऑफशोर पवन परियोजनाओं के लिए 6,853 करोड़ रुपये की ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ (VGF) को मंजूरी दी गई है।

  2. ₹500 करोड़ का प्रोत्साहन: 2025-26 के दौरान उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (GBI) स्कीम के तहत ₹500 करोड़ दिए गए।

  3. ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस: उद्योगों द्वारा स्वच्छ ऊर्जा की सीधी खरीद को आसान बनाने के लिए नए नियम लागू किए गए हैं।

  4. कीमतों में स्थिरता: नवीकरणीय ऊर्जा डेवलपर्स को कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए 500 MW का ‘पायलट प्रोजेक्ट’ (CfD के तहत) शुरू किया गया है।

🌍 वैश्विक भागीदारी से मिलेगी नई ताकत

भारत इस क्षेत्र के विकास में तेजी लाने के लिए यूके (UK), डेनमार्क (Denmark) और बेल्जियम (Belgium) के साथ रणनीतिक सहयोग कर रहा है।

फरवरी 2026 में भारत-यूके ऑफशोर विंड टास्कफोर्स की शुरुआत की गई है। वहीं डेनमार्क के साथ पावर सिस्टम मॉडलिंग और बेल्जियम के साथ रिसर्च व ग्रीन टैक्सोनॉमी पर अहम समझौते हुए हैं।

आगे की राह: पवन ऊर्जा भारत के ‘एनर्जी ट्रांज़िशन’ (ऊर्जा परिवर्तन) में सबसे अहम भूमिका निभाने जा रही है।

मजबूत ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर, ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) आधारित फोरकास्टिंग और 24 घंटे ऊर्जा समाधान (RTC) के साथ भारत न सिर्फ अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा करेगा, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन में भी अपना दबदबा बनाएगा।

नोट: भारत की स्वच्छ ऊर्जा पहलों, जलवायु परिवर्तन की नीतियों और आर्थिक विकास की हर विस्तृत रिपोर्ट के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।