विकसित भारत एक रिपोर्ट : 12 वर्षों में सड़कों और राजमार्गों का महा-परिवर्तन
🛣️ ‘विकसित भारत’ की ओर तेज रफ्तार: 12 सालों में कैसे बदल गया देश का सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर? हाईवे निर्माण में रोज बन रहे नए रिकॉर्ड “
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
किसी भी राष्ट्र के आर्थिक और समग्र विकास में मजबूत सड़क अवसंरचना (Road Infrastructure) की भूमिका सबसे अहम होती है।
पिछले 12 वर्षों में, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में भारत के सड़क और राजमार्ग परिदृश्य में एक अभूतपूर्व क्रांति आई है।
‘The Politics Again’ की इस विशेष रिपोर्ट में आइए जानते हैं कि कैसे भारतमाला परियोजना, नए एक्सप्रेसवे और रिकॉर्ड तोड़ निर्माण गति ने देश की तस्वीर और तकदीर बदल दी है:
🇮🇳 ‘भारतमाला परियोजना’: राष्ट्रीय संपर्क की जीवनरेखा
राजमार्ग क्षेत्र की सबसे बड़ी और परिवर्तनकारी पहलों में से एक ‘भारतमाला परियोजना’ है, जिसे अक्टूबर 2017 में 5.35 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च के साथ मंजूरी मिली थी।
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लक्ष्य: 34,800 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारों का विकास करना।
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उपलब्धि (मार्च 2026 तक): 26,425 किलोमीटर परियोजनाओं के ठेके दिए जा चुके हैं और 22,590 किलोमीटर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इससे देश भर में माल और यात्री आवागमन सुगम हुआ है।
📈 नेशनल हाईवे नेटवर्क में 61% की भारी वृद्धि
भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) नेटवर्क का विस्तार पिछले एक दशक की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
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वर्ष 2014 में देश में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई लगभग 91,287 किलोमीटर थी।
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वित्त वर्ष 2025-26 तक यह बढ़कर 1,46,572 किलोमीटर से अधिक हो गई है, जो सीधे तौर पर 61 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्शाती है।
⏱️ निर्माण में रिकॉर्ड: 11 किमी/दिन से बढ़कर 34 किमी/दिन
भारत ने हाईवे निर्माण की गति में दुनिया को चौंका दिया है।
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जहां 2013-14 में सड़क निर्माण की औसत गति मात्र 11.6 किलोमीटर प्रतिदिन थी।
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वहीं 2025 तक यह गति लगभग 3 गुना बढ़कर 34 किलोमीटर प्रतिदिन हो गई है। आईआईएम बैंगलोर (IIMB) की रिपोर्ट के अनुसार, इस तेज विकास ने औद्योगिक लॉजिस्टिक्स लागत को काफी कम कर दिया है।
🛣️ नए भारत के आधुनिक एक्सप्रेसवे: दूरियां हुईं खत्म
भारत में आधुनिक और एक्सेस-कंट्रोल्ड (Access-Controlled) एक्सप्रेसवे का जाल बिछ रहा है, जो प्रमुख शहरों के बीच यात्रा के समय को आधा कर रहा है:
1. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे
यह लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की लागत और 1,386 किलोमीटर की लंबाई के साथ देश की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना है। दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, एमपी, गुजरात और महाराष्ट्र को जोड़ने वाला यह सबसे लंबा एक्सप्रेसवे होगा। पीएम मोदी 5 जून 2026 तक इसके कई अहम खंडों (राजस्थान और गुजरात) का उद्घाटन कर चुके हैं।
2. दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (82 किमी)
लगभग 8,346 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में आवागमन को पूरी तरह से बदल दिया है, जिससे भयंकर जाम की समस्या खत्म हो गई है।
3. द्वारका एक्सप्रेसवे (29 किमी)
9,000 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना दिल्ली और गुरुग्राम के बीच आधुनिक यातायात का नया मानदंड है। इसके सभी खंड शुरू हो चुके हैं। इसमें बहुस्तरीय इंटरचेंज और उन्नत इंजीनियरिंग का इस्तेमाल हुआ है।
4. बेंगलुरु-मैसूरु एक्सप्रेसवे (118 किमी)
दक्षिण भारत के विकास को गति देने वाले इस 8,480 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट से बेंगलुरु और मैसूरु के बीच यात्रा का समय 3 घंटे से घटकर सिर्फ 75 मिनट रह गया है।
5. दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा (213 किमी)
14 अप्रैल 2026 को पीएम मोदी द्वारा उद्घाटित 12,000 करोड़ रुपये का यह ‘इको-फ्रेंडली’ गलियारा दिल्ली से देहरादून की दूरी को मात्र 2.5 घंटे में समेट देता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वन्यजीव गलियारा है, जो पर्यावरण और विकास के संतुलन का बेहतरीन उदाहरण है।
निष्कर्ष: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ये उपलब्धियां न केवल ‘विकसित भारत’ (Viksit Bharat) के सपने को साकार कर रही हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, क्षेत्रीय विकास और आम नागरिक के जीवन स्तर को भी नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं।
नोट: भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, नई परियोजनाओं और देश की प्रगति से जुड़ी हर विस्तृत और सकारात्मक खबर के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।










