US Iran Talks Failed

इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता विफल: परमाणु मुद्दे पर नहीं बनी सहमति

इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता विफल: 21 घंटे की बातचीत बेनतीजा, मिडिल ईस्ट में गहराया युद्ध और ऊर्जा संकट का खतरा

इस्लामाबाद: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में धधक रही जंग को शांत करने के उद्देश्य से पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई बहुप्रतीक्षित वार्ता पूरी तरह से विफल हो गई है।

लगभग 21 घंटे तक चली इस मैराथन और हाई-वोल्टेज बैठक के बाद दोनों देश किसी भी समझौते पर नहीं पहुंच सके हैं, जिससे पूरी दुनिया की चिंताएं एक बार फिर बढ़ गई हैं।

परमाणु कार्यक्रम पर अड़ा अमेरिका, जेडी वेंस ने मांगी ‘पक्की गारंटी’

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट रूप से कहा कि तीन दौर की लंबी बातचीत के बावजूद दोनों पक्षों में कोई सहमति नहीं बन पाई।

वेंस के अनुसार, बातचीत के बेनतीजा रहने का मुख्य कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम था। अमेरिका की सबसे बड़ी शर्त यह थी कि ईरान परमाणु हथियार बनाने या उससे जुड़े किसी भी कार्यक्रम को पूरी तरह छोड़ने की स्पष्ट और ठोस प्रतिबद्धता दे।

उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा, “हमें इस बात की पक्की गारंटी चाहिए कि ईरान न तो परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करेगा, और न ही ऐसे साधन जुटाएगा जिनकी मदद से वह तेज़ी से ऐसा कर सके।”

उन्होंने आगे कहा, “बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं। हालांकि, मुझे लगता है कि यह अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है।

उन्होंने हमारी शर्तें मानने से इनकार कर दिया है, इसलिए हम बिना किसी समझौते के ही अमेरिका वापस लौट रहे हैं।”

ईरान का पलटवार: ‘अमेरिका की मांगें गैरकानूनी और अत्यधिक’

अमेरिका के कड़े रुख के विपरीत, ईरान ने इस विफलता का ठीकरा वाशिंगटन पर फोड़ा है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि किसी भी बातचीत की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि दूसरा पक्ष कितनी ईमानदारी दिखाता है।

बकाई ने बताया कि पिछले 24 घंटों में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध हटाने, युद्ध मुआवजा और पूरे क्षेत्र में जंग खत्म करने जैसे बेहद अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

उन्होंने अमेरिका पर वार्ता के दौरान अत्यधिक और गैरकानूनी मांगें रखने का आरोप लगाया। वहीं, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ ने भी बातचीत के विफल होने के पीछे सीधे तौर पर अमेरिका की हठधर्मिता को जिम्मेदार ठहराया है।

आगे क्या? दुनिया पर मंडरा रहा भारी ऊर्जा संकट

इस वार्ता के बेनतीजा होने से मिडिल ईस्ट के भविष्य को लेकर गहरे सवाल खड़े हो गए हैं। ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ के विश्लेषण के अनुसार, सबसे बड़ा खतरा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर है।

ईरान की ओर से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से खोलने का कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है, जिसका सीधा मतलब है कि दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति पर मंडरा रहा संकट जारी रहेगा।

जेडी वेंस ने भविष्य की किसी बातचीत का तो कोई संकेत नहीं दिया, लेकिन इतना जरूर कहा कि ईरान अभी भी लौटकर अमेरिका के अंतिम प्रस्ताव को स्वीकार कर सकता है।

अगर दोनों देश अपनी-अपनी जिद पर अड़े रहते हैं, तो यह तय है कि मिडिल ईस्ट में जंग और तेज होगी, जिसका खामियाजा पूरी दुनिया को एक भयानक ऊर्जा और आर्थिक संकट के रूप में भुगतना पड़ सकता है।

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