PM Modi Mandya Temple Inauguration

LIVE कर्नाटक: पीएम ने मांड्या में किया श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर का उद्घाटन

कर्नाटक दौरा: पीएम मोदी ने मांड्या में किया ‘श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर’ का भव्य उद्घाटन, बोले- 2000 साल पुराना है इस पवित्र मठ का इतिहास

मांड्या (कर्नाटक): द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज कर्नाटक के महत्वपूर्ण दौरे पर हैं। इस दौरे के दौरान उन्होंने मांड्या जिले में स्थित ‘श्री क्षेत्र आदिचुंचनगिरि’ का दौरा किया और वहां नव निर्मित ‘श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर’ (Sri Guru Bhairavaikya Temple) का भव्य उद्घाटन किया।

इस खास अवसर पर श्री क्षेत्र आदिचुंचनगिरि की ओर से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां प्रधानमंत्री मोदी को सम्मानित भी किया गया।

बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी को समर्पित है यह मंदिर

नव निर्मित श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर का निर्माण श्री अदिचुंचनगिरि मठ के 71वें पीठाधीश्वर, श्री श्री श्री बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी की पावन स्मृति में किया गया है।

  • वास्तुकला: यह मंदिर पूरी तरह से पारंपरिक ‘द्रविड़ शैली’ (Dravidian Architecture) में बनाया गया है।

  • उद्देश्य: इसे महास्वामीजी की जीवन यात्रा, उनके सामाजिक कार्यों और समाज सेवा में उनके अतुलनीय योगदान को सम्मान देने के लिए एक स्मारक के रूप में स्थापित किया गया है।

पीएम मोदी ने साझा किया अपना आध्यात्मिक अनुभव

मंदिर के उद्घाटन के बाद वहां उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने गहरे आध्यात्मिक अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा:

“आज मेरे मन में बहुत गहरे भाव हैं, जिन्हें शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है। श्री काल भैरव मंदिर में दर्शन और पूजा करना, श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर का उद्घाटन देखना और ऐतिहासिक ‘ज्वालापीठ’ में समय बिताना मेरे लिए एक अत्यंत खास और अद्भुत अनुभव रहा।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि आध्यात्मिक रूप से इतनी ऊंचाई पर पहुंचे संतों के बीच रहना और इस विशाल जनसमूह का आशीर्वाद प्राप्त करना उनके लिए एक यादगार पल है। उन्होंने इस अवसर पर वहां मौजूद सभी लोगों को हार्दिक बधाई दी।

“संतों ने हमेशा समाज को कठिनाइयों से निकाला”

अपने संबोधन में भारतीय सभ्यता और संतों के योगदान पर प्रकाश डालते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमारे समाज में समय-समय पर ऐसे महान व्यक्तित्व आए हैं, जो केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन तक ही सीमित नहीं रहे।

  • ये संत समाज के बीच रहे, उन्होंने आम लोगों के सुख-दुख को समझा।

  • जब भी समाज पर कोई दुख, कष्ट या कठिनाई आई, तो इन संतों ने आगे बढ़कर लोगों को उससे बाहर निकालने का रास्ता दिखाया।

2000 साल पुरानी है आदिचुंचनगिरि मठ की परंपरा

प्रधानमंत्री ने भारत को एक जीवंत और हजारों साल पुरानी सभ्यता बताते हुए कहा कि दुनिया में ऐसे बहुत कम उदाहरण मिलते हैं, जहां परंपराएं इतने लंबे समय तक जीवित रहती हैं।

श्री क्षेत्र आदिचुंचनगिरि महा संस्थान मठ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “यह मठ हमारी इस निरंतरता का जीवंत उदाहरण है।

इस पवित्र मठ का इतिहास लगभग 2000 साल पुराना है। इस मठ की गुरु परंपरा, इसके आध्यात्मिक दर्शन और समाज सेवा की भावना ने सदियों से इस पूरे क्षेत्र को समृद्ध किया है।”

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