बिहार में आज इतिहास रचेगी BJP: सम्राट चौधरी लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ
बिहार में आज रचा जाएगा इतिहास: 46 साल बाद खिला पूर्ण ‘कमल’, 11 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे सम्राट चौधरी; JDU को मिले 2 डिप्टी सीएम
पटना: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
बिहार की सियासत के पन्नों में आज (15 अप्रैल) एक सुनहरा और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है।
भारतीय जनसंघ से लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) तक का 46 वर्षों का लंबा राजनीतिक संघर्ष आज अपने चरम पर पहुंच गया है।
बिहार में पहली बार कोई भाजपा नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने जा रहा है। आज सुबह 11 बजे पटना के लोकभवन में सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री (CM) के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे।
इसके साथ ही जनता दल यूनाइटेड (JDU) कोटे से विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव डिप्टी सीएम (Deputy CM) पद की शपथ लेंगे।
46 साल का संघर्ष: पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री
इससे पहले मंगलवार को निवर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा सौंप दिया था, जिसके बाद एनडीए (NDA) विधायक दल के नेता चुने गए सम्राट चौधरी ने राज्यपाल के समक्ष नई सरकार बनाने का दावा पेश किया।
बिहार की राजनीति में भाजपा हमेशा सक्रिय रही है। पार्टी पहले भी दो बार सबसे बड़े दल के रूप में उभरी, लेकिन गठबंधन धर्म के तहत मुख्यमंत्री की कुर्सी हमेशा नीतीश कुमार के पास ही रही।
यह पहला मौका है जब भाजपा के पास विधायकों की संख्या भी सबसे ज्यादा है और सम्राट चौधरी के रूप में उन्हें अपना मुख्यमंत्री भी मिल गया है।
‘सम्राट’ का सफर: 9 साल पहले आए भाजपा में, आक्रामक छवि बनी ताकत
महज 9 साल पहले भाजपा में शामिल हुए सम्राट चौधरी को उनकी बेहद मुखर और आक्रामक छवि के लिए जाना जाता है।
26 साल पहले पहली बार विधायक बने सम्राट के पास आरजेडी (RJD) से लेकर एनडीए (NDA) सरकार में काम करने का लंबा अनुभव है।
वे 2024 में डिप्टी सीएम बने और 2025 में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद उन्होंने दोबारा डिप्टी सीएम पद की शपथ ली।
प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर संगठन को मजबूत करने वाले सम्राट अब पूरे बिहार का शासन चलाएंगे।
जातीय समीकरणों का ‘मास्टरस्ट्रोक’
सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री और जेडीयू नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाने के पीछे एनडीए का एक मजबूत जातीय गणित (Caste Equation) काम कर रहा है:
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कुशवाहा कार्ड: सम्राट चौधरी पिछड़े वर्ग की कोयरी (कुशवाहा) जाति से आते हैं। बिहार में कोयरी-कुशवाहा समाज की आबादी करीब 4 से 5 प्रतिशत है। ओबीसी (OBC) वर्ग में यादवों के बाद यह दूसरी सबसे बड़ी आबादी है, जिसने सम्राट को सीएम पद का सबसे योग्य उम्मीदवार बना दिया।
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सवर्ण और यादव संतुलन: जेडीयू कोटे से डिप्टी सीएम बन रहे विजय चौधरी ‘भूमिहार’ (सवर्ण) समाज से आते हैं, जबकि बिजेन्द्र यादव जेडीयू में ‘यादव’ वोट बैंक के सबसे बड़े और कद्दावर नेता माने जाते हैं। इस त्रिकोणीय समीकरण (कुशवाहा-भूमिहार-यादव) से एनडीए ने एक बड़ा सियासी संदेश दिया है।
आगे की डगर: चुनौतियां और विपक्ष का निशाना
सम्राट चौधरी के शपथ लेने से पहले ही विपक्षी दलों ने उन पर सियासी हमले तेज कर दिए हैं। अपनी आक्रामक छवि के दम पर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का सफर तय करने वाले सम्राट के सामने अब कई बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं।
पूरे बिहार के विकास को गति देना, राज्य में अपराध पर लगाम लगाना, विपक्ष के सियासी दांवपेंचों का सामना करना और सबसे अहम—एनडीए गठबंधन के सहयोगियों को एक साथ साधकर चलना उनके लिए एक ‘कांटों भरा ताज’ साबित हो सकता है।











