Congress leader Meenakshi Natarajan reacting after the Supreme Court dismissed her plea regarding Rajya Sabha nomination

सुप्रीम कोर्ट से मीनाक्षी नटराजन को झटका, राज्यसभा याचिका खारिज

⚖️ सुप्रीम कोर्ट से कांग्रेस को बड़ा झटका: मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज, भड़कीं नेत्री बोलीं- ‘यह लोकतंत्र के लिए झटका’

नई दिल्ली/भोपाल: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनावों (Rajya Sabha Elections 2026) को लेकर चल रहे सियासी घमासान के बीच कांग्रेस पार्टी को सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) से एक बड़ा झटका लगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपने नॉमिनेशन पेपर (नामांकन पत्र) खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।

‘The Politics Again’ की इस विशेष रिपोर्ट में आइए विस्तार से जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या कहा और मीनाक्षी नटराजन ने इस फैसले पर कैसी प्रतिक्रिया दी है:

🏛️ सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने क्या कहा? (कानूनी पहलू)

सर्वोच्च न्यायालय में जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एएस चंदुरकर की खंडपीठ (Bench) ने इस मामले की सुनवाई की।

कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम इस याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं और इसे खारिज किया जाता है।”

  • अनुच्छेद 329 का हवाला: बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 329 (Article 329) के तहत चुनावी मामलों में हस्तक्षेप पर लगी संवैधानिक रोक का हवाला देते हुए अपनी रिट अधिकार-क्षेत्र का इस्तेमाल करने से साफ इनकार कर दिया।

  • याचिकाकर्ता की दलील खारिज: कोर्ट ने नटराजन के वकील की उस दलील को भी अमान्य कर दिया जिसमें कहा गया था कि नामांकन रद्द होने में हुई “स्पष्ट गलतियों” को ठीक करने के लिए अनुच्छेद 32 का इस्तेमाल किया जा सकता है।

  • चुनाव ट्रिब्यूनल जाने की सलाह: कोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर अदालत कुछ मामलों में दखल दे और बाकी मामलों को ‘चुनाव ट्रिब्यूनल’ के लिए छोड़ दे, तो यह एक ऐसे सिद्धांत को लागू करना होगा जिसका जिक्र संविधान में नहीं है। इसलिए रिट याचिका को सुनवाई के लायक न मानते हुए खारिज कर दिया गया।

🗣️ मीनाक्षी नटराजन का पलटवार: ‘EC निष्पक्ष नहीं’

सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद कांग्रेस नेत्री मीनाक्षी नटराजन ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूरी चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग (Election Commission) की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

‘लोकतंत्र और संविधान के लिए झटका’ नटराजन ने कहा, “यह मेरे लिए कोई व्यक्तिगत झटका नहीं है। यह सीधे तौर पर लोकतंत्र और भारत के संविधान के लिए एक बड़ा झटका है।”

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का आभार जताते हुए कहा कि कम से कम सर्वोच्च न्यायालय ने हमारी याचिका को सुना और उस पर फैसला सुनाया, जबकि चुनाव आयोग का रवैया बेहद निराशाजनक रहा।

चुनाव आयोग पर लगाए पक्षपात के आरोप:

  • “मैं पहले दिन से कह रही हूं कि चुनाव आयोग पूरी तरह से निष्पक्ष नहीं रहा है, और आज यह बात एक बार फिर साबित हो गई है।”

  • “जब हमारे लोग चुनाव आयोग के पास अपनी शिकायत लेकर गए, तो उन्होंने 48 घंटे तक हमें कोई जवाब नहीं दिया।”

  • उन्होंने आगे कहा कि जब अदालत में मध्य प्रदेश राज्य के वकील खड़े होते हैं, तो यह मामला राज्य से जुड़ा नहीं रह जाता।

  • “हम राज्य सरकार के खिलाफ नहीं लड़ रहे थे; हम चुनाव आयोग के खिलाफ लड़ रहे थे। हम यह बता रहे थे कि रिटर्निंग ऑफिसर कैसे निष्पक्ष नहीं थे, और वे अब जनता के सामने पूरी तरह बेनकाब हो गए हैं।”

इस कानूनी हार के साथ ही मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीटों पर भाजपा के निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता पूरी तरह साफ और कानूनी रूप से सुरक्षित हो गया है।