Tripartite MoU signed between Centre, Assam, and Nagaland for oil and gas exploration to tackle Strait of Hormuz crisis

असम-नागालैंड तेल समझौता: होर्मुज संकट से अब उबरेगा भारत

🛢️ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट का ‘मास्टरस्ट्रोक’: असम-नागालैंड और केंद्र के बीच ऐतिहासिक तेल समझौता, 10 गुना बढ़ेगा उत्पादन”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पश्चिम एशिया में गहराते तनाव और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) संकट के कारण दुनिया भर में ऊर्जा संकट और एलपीजी गैस की किल्लत की आशंकाएं बढ़ गई हैं।

इस वैश्विक संकट से भारत को सुरक्षित निकालने और घरेलू उत्पादन को रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद अहम और ऐतिहासिक फैसला लिया है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने हाइड्रोकार्बन (तेल और गैस) की घरेलू खोज और उत्पादन को बढ़ाने के लिए नागालैंड और असम के साथ एक तीन-पक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

‘The Politics Again’ की इस विशेष रिपोर्ट में आइए समझते हैं कि कैसे यह समझौता भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित होने वाला है:

🗺️ असम और नागालैंड में छिपा है भारत की ऊर्जा का खजाना

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पूर्वोत्तर भारत की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी साझा करते हुए उन्होंने बताया:

  • असम का भंडार: अकेले असम में भारत के कुल कच्चे तेल (Crude Oil) के भंडार का लगभग 22% और देश के प्राकृतिक गैस (Natural Gas) भंडार का लगभग 15% हिस्सा मौजूद है।

  • नागालैंड की क्षमता: नागालैंड के असम-अराकान बेसिन की ‘नागा-शुपेन बेल्ट’ में हाइड्रोकार्बन की अपार संभावनाएं हैं। यहाँ ऐसे संसाधन भारी मात्रा में मौजूद हैं जिनका अभी तक पूरी तरह से दोहन नहीं हुआ है।

इस समझौते के बाद भारत में भविष्य में होने वाली एलपीजी गैस और कच्चे तेल की किल्लत पूरी तरह खत्म होने की उम्मीद है।

📈 तेल उत्पादन में होगा ‘दस गुना’ का जादुई इजाफा

इस त्रिपक्षीय समझौते (MoU) का सबसे बड़ा असर सीधा उत्पादन के आंकड़ों पर देखने को मिलेगा।

  • वर्तमान स्थिति: अभी इस सीमा क्षेत्र में तेल की उत्पादन क्षमता महज 1000 से 1500 बैरल प्रतिदिन है।

  • नया लक्ष्य: इस ऐतिहासिक समझौते के लागू होने के बाद इस उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर लगभग दस गुना तक किया जा सकता है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समझौते पर हस्ताक्षर समारोह को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि यह कदम पूर्वोत्तर क्षेत्र में खनिज तेल की खोज के नए अवसर पैदा करेगा और इस पूरे क्षेत्र के विकास व समृद्धि को एक नई और तेज गति देगा।

🤝 निवेशकों का बढ़ेगा भरोसा और पैदा होंगे रोजगार

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस एमओयू के आर्थिक और रणनीतिक फायदों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल एक कागजी कार्यवाही नहीं है, बल्कि यह:

  1. निवेशकों को देगा भरोसा: यह संबंधित सरकारों के बीच सहयोग का एक मजबूत ढांचा तैयार करता है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और लंबे समय के निवेश के लिए जरूरी माहौल बनेगा।

  2. रेगुलेटरी तालमेल: इससे प्रशासनिक और रेगुलेटरी बाधाएं दूर होंगी, जिससे कामकाज लगातार और बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा।

  3. रोजगार के नए अवसर: मिनरल ऑयल के क्षेत्र में कामकाज तेज होने से स्थानीय स्तर पर सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार पैदा होंगे।

  4. इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास: इससे स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा, फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचा) मजबूत होगा और कॉन्ट्रैक्टरों व सर्विस प्रोवाइडरों के लिए व्यापार के नए मौके बनेंगे।

कुल मिलाकर, यह समझौता भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और विदेशी निर्भरता को खत्म करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और ठोस कदम है।

नोट: देशभर की राजनीति, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सेक्टर की बड़ी रणनीतिक खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।