Vice President C.P. Radhakrishnan launching the book 'Agathiyar - The Unifier' along with other dignitaries in New Delhi

‘अगथियार-द यूनिफायर’ का विमोचन: ऋषि-मुनियों ने किया भारत को एकजुट

📚 “भारत को राजाओं ने नहीं, संतों ने किया एकजुट”: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने किया ‘अगथियार-द यूनिफायर’ का विमोचन, भाषाई राजनीति पर साधा निशाना”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारत की एकता और अखंडता को लेकर अक्सर राजनीतिक बहसें होती रहती हैं, लेकिन इस एकता की असली नींव किसने रखी?

इस सवाल का जवाब देते हुए भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भारत को असल में एकजुट करने वाले यहाँ के संत और ऋषि-मुनि थे, न कि केवल राजनीतिक संस्थाएं।

सोमवार (15 जून 2026) को नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में “अगथियार – द यूनिफायर” (Agathiyar – The Unifier) नामक पुस्तक का विमोचन करते हुए उपराष्ट्रपति ने देश की सांस्कृतिक विरासत, भाषाई सद्भाव और महर्षि अगस्त्य (अगथियार) के योगदान पर खुलकर अपनी बात रखी।

‘The Politics Again’ की इस विशेष रिपोर्ट में आइए जानते हैं उपराष्ट्रपति के संबोधन की प्रमुख बातें:

🧘‍♂️ एकता के असली शिल्पकार हैं ऋषि-मुनि

समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति श्री राधाकृष्णन ने भारत की सभ्यतागत एकता पर जोर दिया।

  • उन्होंने कहा कि जब भी राष्ट्रीय एकीकरण की बात होती है, तो अक्सर राजाओं और राजनीतिक संस्थाओं को याद किया जाता है।

  • लेकिन भारत की एकता के असली शिल्पकार (Architects) यहाँ के साधु-संत और ऋषि थे।

  • उन्होंने अगथियार ऋषि को हिमालय से लेकर हिंद महासागर तक फैली भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का सबसे बड़ा प्रतीक बताया, जिन्हें उत्तर और दक्षिण दोनों परंपराओं में समान रूप से पूजा जाता है।

🌉 उत्तर और दक्षिण भारत के बीच ‘सेतु’ हैं अगथियार

तमिलनाडु की पोथिगई पहाड़ियों और कावेरी नदी का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये आज भी अगथियार ऋषि की याद दिलाती हैं।

  • तमिल व्याकरण में योगदान: उन्होंने तमिल संगम परंपरा और तमिल व्याकरण के विकास में अगथियार के अहम योगदान पर प्रकाश डालते हुए उन्हें उत्तर और दक्षिण भारत की संस्कृतियों के बीच एक ‘सेतु’ बताया।

  • सांस्कृतिक प्रमाण: उन्होंने बताया कि तमिलनाडु में 100 से अधिक मंदिर ‘अगस्त्येश्वर’ के रूप में अगथियार को समर्पित हैं।

  • काशी और तमिलनाडु दोनों जगहों पर एक ही नाम वाले मंदिरों का होना हमारी सांस्कृतिक एकता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

🗣️”तमिल के लिए काम करने वालों को किया जा रहा दरकिनार”

भाषाई राजनीति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की भाषाएँ एक-दूसरे की प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि बहनें हैं।

  • उन्होंने बेबाकी से कहा कि आज कई लोगों ने तमिल भाषा के जरिए तरक्की की और राजनीतिक लाभ उठाया, लेकिन जिन्होंने अपना जीवन तमिल के लिए समर्पित कर दिया, उन्हें आज दरकिनार किया जा रहा है।

  • उन्होंने महान विद्वान ‘तमिल थाथा’ यू. वे. स्वामीनाथ अय्यर के बलिदान को याद करते हुए दुख जताया कि उनकी सेवाओं को जनता तक सही तरीके से नहीं पहुँचाया गया, जबकि उन्होंने ही तमिल की अनमोल साहित्यिक संपदा को नष्ट होने से बचाया था।

🇮🇳 ‘कोई भी ताकत भारत में फूट नहीं डाल सकती’

उपराष्ट्रपति ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया कि ‘ब्रिटिश शासन के बिना भारत एकजुट नहीं रहता’।

उन्होंने आगाह किया कि कुछ लोग भाषाई मतभेद पैदा करके विभाजनकारी प्रवृत्तियों को बढ़ावा देते हैं, लेकिन कोई भी ताकत भारत में फूट नहीं डाल सकती।

समारोह में दिग्गजों का जमावड़ा: यह पुस्तक ‘कलैमगल’ (Kalaimagal) पत्रिका द्वारा प्रकाशित की गई है, जो पिछले 95 वर्षों से तमिल साहित्य की सेवा कर रही है।

इस गरिमामयी अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री सुनील आंबेकर, कलैमगल के संपादक श्री कीलमबुर शंकर सुब्रमण्यम, वरिष्ठ पत्रकार श्री मालन, पुस्तक के लेखक श्री ओ. श्यामा भट्ट और डॉ. एम. एन. सुधा सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

नोट: भारत की सांस्कृतिक विरासत, साहित्य जगत की बड़ी हलचलों और राष्ट्रीय महत्व की हर खबर के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।