अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति में रिकॉर्ड वृद्धि, आंकड़े जारी
अनुसूचित जाति के छात्रों की शिक्षा को मिली उड़ान: छात्रवृत्ति कवरेज में रिकॉर्ड वृद्धि, DBT से सीधे खातों में पहुंची रकम”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट
केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने देश भर में अनुसूचित जाति (SC) के विद्यार्थियों के शैक्षिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
चालू वित्तीय वर्ष के दौरान ‘मैट्रिक-पूर्व’ (Pre-Matric) और ‘मैट्रिक-पश्चात’ (Post-Matric) छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत पात्र एससी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति कवरेज और धन वितरण में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।
DBT से आई पारदर्शिता और तेजी
विभाग के अनुसार, 2021-22 (मैट्रिक-पश्चात) और 2022-23 (मैट्रिक-पूर्व) में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) व्यवस्था लागू होने के बाद से छात्रवृत्ति वितरण में एक बड़ी क्रांति आई है। DBT ढांचे के कारण अब बिचौलियों की भूमिका खत्म हो गई है और धनराशि सीधे लाभार्थियों के आधार-लिंक्ड (Aadhaar-linked) बैंक खातों में ट्रांसफर की जा रही है, जिससे योजना में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता सुनिश्चित हुई है।
वित्त वर्ष 2025-26 के रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े
केंद्र सरकार ने पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में छात्रवृत्ति वितरण का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाया है:
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मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति (SC एवं अन्य): इस योजना के तहत 562.36 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई, जिससे 26.79 लाख विद्यार्थियों को सीधा लाभ पहुंचा।
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मैट्रिक-पश्चात छात्रवृत्ति (SC): उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों के लिए 6,208.08 करोड़ रुपये वितरित किए गए, जिससे 47.53 लाख विद्यार्थियों को फायदा मिला।
चालू वित्तीय वर्ष में लाभार्थियों की संख्या में भारी उछाल
1 अप्रैल 2026 से 31 मई 2026 तक के शुरुआती दो महीनों के आंकड़ों ने भी पिछले वर्ष के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं:
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मैट्रिक-पूर्व योजना में लाभार्थियों की संख्या पिछले साल की समान अवधि के 2.36 लाख से बढ़कर 5.75 लाख हो गई है। यह 143.64 प्रतिशत की शानदार वृद्धि है।
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मैट्रिक-पश्चात योजना के तहत यह संख्या 10.27 लाख से बढ़कर 16.63 लाख हो गई है, जो 61.92 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने स्पष्ट किया है कि छात्रवृत्ति कवरेज में यह ऐतिहासिक वृद्धि वंचित समुदायों के विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक अवसरों का विस्तार करने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता का सीधा परिणाम है।











