Deep investigation by SIT and UP police at Ayodhya Ram Mandir regarding donation theft

राम मंदिर चढ़ावा चोरी : बाथरूम में छिपती थीं नोटों की गड्डियां

राम मंदिर चढ़ावा चोरी का खौफनाक खेल: बाथरूम में छिपती थीं नोटों की गड्डियां; सभी 8 आरोपियों पर लगेगा गैंगस्टर एक्ट”

अयोध्या: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

रामनगरी अयोध्या के भव्य राम मंदिर में हुए चढ़ावा और दान चोरी मामले में पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) ने अपना शिकंजा पूरी तरह कस दिया है।

‘The Politics Again’ की रिपोर्ट के अनुसार, 6 जून को उजागर हुए इस संवेदनशील मामले में एसआईटी की सिफारिश के बाद रामजन्मभूमि कोतवाली में नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है।

पकड़े गए सभी 8 आरोपियों से रातभर कड़ी पूछताछ की गई है, जिसके बाद आज उन्हें जेल भेजने की तैयारी है।

खुलासा: बाथरूम के रास्ते पार होती थीं करोड़ों की गड्डियां

जांच में आरोपियों की ‘मोडस ऑपरेंडी’ (चोरी करने के तरीके) को लेकर बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

यह कोई आम चोरी नहीं, बल्कि पिछले 2-3 साल से चल रहा एक सुव्यवस्थित और संगठित अपराध था।

  • बाथरूम में छिपाते थे कैश: चढ़ावे की गिनती (Cash Counting) के दौरान आरोपी अनुकल्प मिश्रा और उसके साथी बड़ी चालाकी से नोटों की गड्डियां गायब कर देते थे। इन गड्डियों को तुरंत मंदिर परिसर के बाथरूम में छिपा दिया जाता था।
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  • बाहर होता था बंटवारा: मौका पाते ही इन रुपयों को सुरक्षित तरीके से मंदिर परिसर से बाहर निकाला जाता था और फिर एक तय मकान में जाकर आपस में बांट लिया जाता था।

इस शातिर खेल के मुख्य मास्टरमाइंड सुभाष श्रीवास्तव (गणना इंचार्ज) और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव थे।

सुभाष ही वह व्यक्ति था जिसने इस पूरी साजिश का ताना-बाना बुना और गणना ड्यूटी में अपने भरोसेमंद लोगों को शामिल किया।

करोड़ों की रिकवरी और बैंक अफसरों पर रडार

एसआईटी की जांच में अब तक करोड़ों रुपये के हेरफेर की पुष्टि हुई है।

  • रिकवरी: पुलिस के अनुसार अब तक 60 लाख रुपये नकद बरामद किए जा चुके हैं, जबकि ट्रस्ट की निशानदेही पर करीब 3 करोड़ रुपये के जेवरात और नकदी पहले ही बरामद की जा चुकी है।
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  • सरकारी बैंककर्मी शामिल: मुख्य आरोपियों ने पूछताछ में कुछ सरकारी बैंक अधिकारियों की संलिप्तता के राज भी उगले हैं। साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही इन बैंककर्मियों पर भी गाज गिर सकती है।
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  • लगेगा गैंगस्टर एक्ट: मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी विवेचना किसी वरिष्ठ आईपीएस (IPS) या पीपीएस (PPS) अधिकारी को सौंपी जा रही है।
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  • पुलिस ने साफ किया है कि इस संगठित गिरोह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने के बाद गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।

नामजद 8 मुख्य आरोपी और उनकी भूमिका

क्र. सं. आरोपी का नाम पहचान और मामले में भूमिका
1. रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू चंपत राय का करीबी, गणना कक्ष की चाबियों का प्रभारी और मुख्य नियंत्रक।
2. सुभाष श्रीवास्तव गणना इंचार्ज, जिसने पूरी निगरानी का फायदा उठाकर अन्य लोगों को इस खेल में जोड़ा।
3. अनुकल्प मिश्रा डॉ. अनिल मिश्र का रिश्तेदार, जिसके घर से चोरी की रकम बरामद हुई।
4. लवकुश मिश्रा अनुकल्प का साला और डॉ. अनिल मिश्र का रिश्तेदार, घर से कैश बरामद।
5. मनीष यादव टिन्नू यादव का भतीजा, जो कैश काउंटिंग प्रक्रिया में शामिल रहता था।
6. अविनाश शुक्ला गणना ड्यूटी में शामिल, बैंक खाते से 5 लाख रुपये मिलने की चर्चा।
7. करुणेश पांडेय अनुकल्प और लवकुश के साथ मिलकर साजिश रचने में शामिल।
8. रमाशंकर मिश्र पूरी साजिश और रकम को ठिकाने लगाने में सह-आरोपी।

 

राजनीतिक घमासान: केजरीवाल का ‘डाका’ वाला आरोप

इस मामले ने अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी उबाल ला दिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और राज्यसभा सांसद संजय सिंह बृहस्पतिवार को अयोध्या पहुंचे।

मीडिया से बात करते हुए केजरीवाल ने तीखा हमला बोला:

“भगवान के घर में डाका डाला गया है। भगवान की पादुका, माला और गहने तक चोरी कर लिए गए, जिससे मेरा मन विचलित है। बिना एफआईआर के 18 दिन तक जांच करना गैर-कानूनी है। एसआईटी केवल लीपापोती कर रही है और बड़े लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।”

संत समाज का फूटा गुस्सा

दूसरी तरफ, केजरीवाल के इस दौरे और बयानों का अयोध्या के संत समाज ने कड़ा विरोध किया है। जगद्गुरु परमहंसाचार्य, हनुमानगढ़ी के पुजारी राजूदास और स्थानीय पंडा समाज ने उनके खिलाफ नाराजगी व्यक्त करते हुए ज्ञापन सौंपा है।

इस्तीफों की अफवाहों के बीच ट्रस्ट की महाबैठक

बृहस्पतिवार को पूरे दिन अयोध्या में यह चर्चा जोरों पर रही कि इस भारी चूक के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र अपने पदों से इस्तीफा दे सकते हैं।

इस अफवाह को तब और हवा मिल गई जब विश्व हिंदू परिषद (VHP) और ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों (मिलिंद परांडे, विनायक राव और बजरंग लाल बांगड़ा) के बीच एक गुप्त और हाई-प्रोफाइल बैठक हुई।

हालांकि, देर शाम तक ट्रस्ट या सरकार की ओर से किसी भी इस्तीफे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन शुक्रवार को दोनों पदाधिकारियों के इस्तीफे की पुष्टि हो गई ।