मेलबर्न में ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बानीज़ के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पीएम मोदी

मेलबर्न में पीएम मोदी बोले, सीमा पार आतंकवाद पूरी मानवता का दुश्मन

मेलबर्न में PM मोदी की दो टूक: ‘सीमा-पार आतंकवाद पूरी मानवता के लिए खतरा, युद्ध नहीं बातचीत से निकलेगा समाधान’

मेलबर्न : THE POLITICS AGAIN डेस्क (फॉरेन पॉलिसी/इंटरनेशनल डेस्क): संतोष सेठ की रिपोर्ट

ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में आयोजित तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया सालाना शिखर सम्मेलन (Annual Summit) के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ (Anthony Albanese) के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया।

 

इस दौरान पीएम मोदी ने दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच बढ़ते ऑपरेशनल तालमेल का जिक्र किया और ग्लोबल सिक्योरिटी के मुद्दे पर दुनिया को एक कड़ा संदेश दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सीमा-पार आतंकवाद (Cross-border Terrorism) दुनिया की शांति और स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि नई दिल्ली और कैनबरा मिलकर आतंकी नेटवर्क को खत्म करने के साझा अभियान में मजबूती से एकजुट हैं।

आतंकवाद के खिलाफ भारत-ऑस्ट्रेलिया का अटूट संकल्प

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने आतंकवाद को किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की समस्या बताया।

  • साझा लड़ाई: उन्होंने कहा, “आज हमने कई क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। भारत और ऑस्ट्रेलिया का मानना ​​है कि आतंकवाद न केवल किसी एक देश के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक गंभीर चुनौती है।”

  • आतंक पर प्रहार: पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ दोनों देशों की लड़ाई साझा है और संकल्प बिल्कुल अटूट है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग लगातार मज़बूत हो रहा है।

‘सैन्य टकराव नहीं, कूटनीति से निकलेगा स्थायी हल’

दुनिया भर में चल रहे तनावपूर्ण और संवेदनशील हालातों (जैसे मध्य पूर्व और यूरोप के संघर्ष) के बीच, प्रधानमंत्री ने भारत के उस सैद्धांतिक रुख को मज़बूती से दोहराया जो बातचीत और शांति की वकालत करता है।

  • उन्होंने जोर देकर कहा कि सैन्य टकराव से कभी कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सकता।

  • भू-राजनीतिक तनाव की जगह कूटनीति (Diplomacy) को तरजीह देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “हमारा यह भी मानना ​​है कि दुनिया के कई हिस्सों में तनाव और युद्धों का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से ही हो सकता है।”

इंडो-पैसिफिक में शांति और लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर

प्रधानमंत्री ने इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) क्षेत्र के महत्व पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने इस क्षेत्र के रणनीतिक भूगोल को केवल समुद्री रास्तों के मिलन-स्थल के रूप में देखने के बजाय, लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए एक बेहद अहम क्षेत्र के तौर पर रेखांकित किया।

  • नियमों पर आधारित व्यवस्था: उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता, नेविगेशन की आज़ादी (Freedom of Navigation) और नियमों पर आधारित व्यवस्था (Rule-based Order) को और मज़बूत करेंगे।

  • अहम भूमिका: पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों लोकतांत्रिक देश मिलकर वैश्विक और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में एक बहुत ही खास और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।