IIM उदयपुर का नया ऑनलाइन द्विभाषी BBA प्रोग्राम

पीयूष गोयल: IIM उदयपुर का द्विभाषी BBA कोर्स मिटाएगा ग्रामीण-शहरी खाई

IIM उदयपुर का ऑनलाइन द्विभाषी BBA कोर्स लॉन्च, पीयूष गोयल बोले- ‘यह मिटाएगा ग्रामीण-शहरी खाई’

उदयपुर : THE POLITICS AGAIN डेस्क: संतोष सेठ की रिपोर्ट

प्रबंधन शिक्षा (Management Education) के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) उदयपुर ने अपना नया ऑनलाइन द्विभाषी बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) कार्यक्रम शुरू किया है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने सोमवार को नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से इस नवगठित पाठ्यक्रम का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर श्री गोयल ने कहा कि प्रौद्योगिकी-आधारित यह द्विभाषी शिक्षा ग्रामीण और शहरी छात्रों के बीच की खाई को पाटने का काम करेगी।

इससे देश के प्रतिभाशाली और जरूरतमंद छात्रों को, उनकी परिस्थितियों की परवाह किए बिना, उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा सुलभ हो सकेगी।

शिक्षा की पहुंच: ‘IIM के क्लासरूम अब स्क्रीन पर’

केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में लगभग 100 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं। नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग समय की मांग है।

  • भाषा नहीं बनेगी बाधा: हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध यह द्विभाषी (Bilingual) प्रोग्राम IIM की विश्वसनीयता को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएगा।

  • हर जगह पहुंच: श्री गोयल ने कहा, “IIM के क्लासरूम अब स्क्रीन पर दिखाई देंगे। यह प्रोग्राम भीलवाड़ा की छोटी दुकान से लेकर बस्तर के सुदूर इलाकों तक पहुंच सकता है।”

  • पारदर्शिता और जवाबदेही: यद्यपि यह कार्यक्रम पूरी तरह से ऑनलाइन होगा, लेकिन इसकी परीक्षाएं ऑफलाइन मोड में ही आयोजित की जाएंगी, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता और जवाबदेही से कोई समझौता न हो।

कार्यक्रम को विश्वस्तरीय बनाने के लिए दिए 4 अहम सुझाव

श्री गोयल ने IIM उदयपुर के इस कार्यक्रम को और अधिक सुदृढ़ और व्यावहारिक बनाने के लिए चार प्रमुख सुझाव दिए:

  1. हाइब्रिड मॉडल और पारस्परिक बातचीत: छात्रों और शिक्षकों के बीच संवाद के लिए हाइब्रिड मॉडल अपनाया जाए, जिसमें शिक्षकों के मासिक दौरे शामिल हों। प्रबंधन शिक्षा केवल स्क्रीन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

  2. सॉफ्ट स्किल (Soft Skills) विकास: छात्रों को प्रौद्योगिकी के ज्ञान के साथ-साथ संचार कौशल (Communication Skills), टीम वर्क और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसी सॉफ्ट स्किल्स में भी निपुण बनाया जाए।

  3. प्रायोगिक शिक्षा (Experiential Learning): छात्रों को केवल किताबी ज्ञान न देकर कारखानों, बंदरगाहों और औद्योगिक समूहों (Industrial Clusters) का ऑन-साइट दौरा कराया जाए, जिससे उन्हें व्यावहारिक प्रबंधन का अनुभव मिल सके।

  4. वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएं (Global Best Practices): ऑडियो-विजुअल टूल्स, क्रेडिट ट्रांसफर और अन्य बेहतरीन संस्थानों के साथ साझेदारी करके संयुक्त कार्यक्रम चलाए जाएं। चौथे वर्ष में छात्रों को रिसर्च वर्क और इंटर्नशिप के अवसर प्रदान किए जाएं।

एडटेक (EdTech) और नए वैश्विक अवसर

शिक्षा में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान एडटेक कंपनियां एक आवश्यकता बनकर उभरीं, जिन्होंने गांवों और शहरों के बीच एक डिजिटल सेतु का काम किया।

आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उभरती तकनीकों के कारण प्रबंधन की जरूरतें तेजी से बदल रही हैं।

अंत में, श्री गोयल ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि नए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) भारत के विनिर्माण और नवाचार को नई गति दे रहे हैं।

‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ भारत के युवाओं के लिए अब वैश्विक अवसर खुल चुके हैं, जिनका उन्हें पूरा लाभ उठाना चाहिए।