IIT मद्रास MSMEs संगोष्ठी : डिजिटल कॉमर्स से ‘लोकल से ग्लोबल’ की उड़ान
‘लोकल से ग्लोबल’ की उड़ान: IIT मद्रास में MSMEs के लिए डिजिटल कॉमर्स पर राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न”
चेन्नई: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को घरेलू सीमाओं से निकालकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के उद्देश्य से 18 अगस्त को आईआईटी मद्रास में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
“स्थानीय से वैश्विक तक
डिजिटल वाणिज्य के माध्यम से निर्यात के लिए तैयार एमएसएमई को सक्षम बनाना” विषय पर आयोजित इस सेमिनार में नीति निर्माताओं, वित्तीय संस्थानों और डिजिटल कॉमर्स के विशेषज्ञों ने भारतीय उद्यमों की वैश्विक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत रोडमैप तैयार किया।
यह आयोजन एमएसएमई मंत्रालय (एमएसएमई विकास एवं सुविधा कार्यालय, चेन्नई) और आईआईटी मद्रास के उद्यमिता प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
उद्घाटन सत्र और प्रमुख वक्ताओं के विचार
संगोष्ठी में केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ-साथ शिक्षा जगत के दिग्गजों ने एमएसएमई सेक्टर के विकास पर अपने विचार साझा किए:
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श्री प्रवीण यादव (अपर मुख्य सचिव, एमएसएमई विभाग, तमिलनाडु): उन्होंने जोर देकर कहा कि डिजिटल वाणिज्य आज भौगोलिक सीमाओं को तोड़ रहा है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारतीय उद्यमों को आगे रखने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच मजबूत तालमेल की आवश्यकता है।
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प्रोफेसर मनु संथनम (डीन आईसी एंड एसआर, आईआईटी मद्रास): उन्होंने एमएसएमई को नई तकनीकों और उत्पादों के विकास के लिए ‘नवाचार’ (Innovation) और ‘शिक्षा-उद्योग सहयोग’ (Academia-Industry Collaboration) को अहम बताया।
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श्री हंसराज वर्मा (महानिदेशक, राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम परिषद): उन्होंने स्पष्ट किया कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में टिके रहने के लिए ‘गुणवत्ता’ और ‘डिजिटलीकरण’ दोनों अनिवार्य शर्तें हैं।
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श्री धायलन (निदेशक एवं प्रमुख, एमएसएमई डीएफओ चेन्नई): इन्होंने मुख्य भाषण दिया, जबकि उप निदेशक श्रीमती रेशमा राजीवन ने अपने स्वागत भाषण में एमएसएमई को वैश्विक अवसरों की ओर मोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
तकनीकी सत्र: विशेषज्ञों ने साझा किए निर्यात के गुर
इस संगोष्ठी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसके तकनीकी सत्र रहे, जहां डीजीएफटी (DGFT), एक्जिम बैंक (EXIM Bank), ईसीजीसी (ECGC) और ई-कॉमर्स क्षेत्र के विशेषज्ञों ने सीधे तौर पर उद्यमियों का मार्गदर्शन किया। इन सत्रों में निम्नलिखित विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी गई:
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निर्यात की जटिल प्रक्रियाएं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियम।
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व्यापार वित्त (Trade Finance) और अंतरराष्ट्रीय भुगतान के सुरक्षित तरीके।
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निर्यात जोखिम न्यूनीकरण (Export Risk Mitigation) और अनुपालन (Compliance)।
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डिजिटल ऑनबोर्डिंग और विदेशी ग्राहकों तक पहुंचने के लिए ई-कॉमर्स का सही उपयोग।
सरकारी विजन और ‘क्रय एवं विपणन सहायता योजना’
यह आयोजन सरकार के उस व्यापक विजन का हिस्सा है, जिसके तहत एमएसएमई की बाजार तक पहुंच को मजबूत किया जा रहा है।
एमएसएमई मंत्रालय की ‘क्रय एवं विपणन सहायता योजना’ के अंतर्गत राष्ट्रीय कार्यशालाओं को क्षमता-निर्माण के एक प्रमुख घटक के रूप में शामिल किया गया है।
इसका मुख्य उद्देश्य छोटे उद्यमियों को पैकेजिंग, आयात-निर्यात प्रक्रियाओं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के प्रति जागरूक करना है।
इस सेमिनार ने न केवल मौजूदा उद्यमियों को बल्कि आईआईटी के छात्रों और उभरते स्टार्टअप्स को भी डिजिटल उद्यमिता और अंतरराष्ट्रीय बाजार के अवसरों को समझने का एक शानदार मंच प्रदान किया।











