Tribal women processing minor forest produce at Van Dhan Vikas Kendra under PM Janjatiya Vikas Mission PMJVM

पीएम जनजातीय विकास मिशन: आदिवासियों को उद्यमी बना रही सरकार

पीएम जनजातीय विकास मिशन: वन धन से संवर रहा आदिवासियों का भविष्य, बिचौलियों के जाल से मिली मुक्ति”

नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

भारत की 10.4 करोड़ अनुसूचित जनजातियों की आजीविका का एक बड़ा हिस्सा लघु वन उपज (Minor Forest Produce – MFP) पर निर्भर करता है।

इनकी वार्षिक आय का 20 से 40 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं उपजों से आता है। ऐतिहासिक रूप से बिचौलियों द्वारा औने-पौने दामों पर उपज खरीदे जाने से इन समुदायों को उनकी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिल पाता था।

इस व्यवस्था को जड़ से बदलने और आदिवासियों को उद्यमी बनाने के लिए सरकार ‘प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन’ (PMJVM) चला रही है, जो जनजातीय वन अर्थव्यवस्था में आय के नए और मजबूत रास्ते खोल रहा है।

वन धन विकास केंद्र (VDVK) से बन रहे उद्यमी

पीएमजेवीएम के तहत आदिवासियों को स्वयं सहायता समूहों (SHG) में संगठित कर ‘वन धन विकास केंद्रों’ से जोड़ा जाता है।

यहाँ उन्हें अपनी उपज के प्रसंस्करण (Processing) और पैकेजिंग का प्रशिक्षण मिलता है, जिससे वे केवल कच्चा माल बेचने वालों से आगे बढ़कर मूल्य वर्धित उद्यमी (Value-added Entrepreneurs) बन रहे हैं।

योजना के प्रमुख आंकड़े (जुलाई 2026 तक)

विवरण

स्वीकृत वन धन विकास केंद्र (VDVK)

4,172

जुड़े हुए कुल आदिवासी सदस्य

12.48 लाख

अब तक की कुल बिक्री

लगभग 168 करोड़ रुपये

एमएसपी (MSP) के दायरे में लघु वन उपज

87 उत्पाद

 

कैसे काम करता है यह जनजातीय मिशन?

यह मिशन आदिवासियों को बड़े राष्ट्रीय और डिजिटल बाजारों से जोड़कर उनकी उपज का सही मूल्य दिलाता है:

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): सरकार 87 लघु वन उपजों को पूर्व-निर्धारित एमएसपी पर खरीदकर उचित मूल्य की गारंटी देती है। ट्राइफेड (TRIFED) इस खरीद में मुख्य भूमिका निभाता है।

  • तकनीकी और ढांचागत मदद: केंद्रों पर प्राथमिक प्रसंस्करण उपकरण (काटने, सुखाने, पैकेजिंग मशीनें) और कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराई जाती है।

  • बाजार और ई-कॉमर्स: ट्राइफेड के जरिए उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, प्रदर्शनियों, स्थानीय हाटों और कारीगर मेलों से जोड़ा जाता है।

  • ब्रांडिंग और जीआई (GI) टैग: स्थानीय जनजातीय उत्पादों की ब्रांडिंग और उनकी विशिष्ट भौगोलिक पहचान के लिए जीआई टैग दिलाने में सरकार मदद करती है।

महिला सशक्तिकरण की नई उड़ान

वन उपजों को इकट्ठा करने में महिलाओं की भूमिका सबसे अहम होती है, इसलिए यह मिशन उनके आर्थिक सशक्तिकरण का बड़ा माध्यम बन गया है।

उदाहरण के लिए, अरुणाचल प्रदेश के लेपराडा जिले में ‘न्यगामाने, हो योर्बे, मेदुमहगदुम’ वन धन विकास केंद्र की 300 महिला सदस्य भूत जोलोकिया (किंग चिली) का अचार, हल्दी पाउडर, और अनानास जैम जैसे उत्पाद बना रही हैं।

2022-23 से अब तक इन्होंने 11 लाख रुपये से अधिक की बिक्री की है। अब ये महिलाएं केवल मज़दूर नहीं, बल्कि एक सफल ब्रांड की मालकिन बन गई हैं।

यह मिशन सही मायनों में ‘सबका साथ, सबका विकास’ को साकार करते हुए 2047 के विकसित भारत के दृष्टिकोण को जमीनी स्तर पर मजबूती दे रहा है।

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