CM Yogi Ek Ped Maa Ke Naam

यूपी में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान, सीएम योगी ने लगाया पौधा

‘एक पेड़ मां के नाम’: सीएम योगी ने लगाया आम का पौधा, उत्तर प्रदेश में 9 साल में 242 करोड़ पौधारोपण का रिकॉर्ड “

लखनऊ: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्यावरण संरक्षण का बड़ा संदेश दिया है।

शुक्रवार को अपने सरकारी आवास पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत आम का पौधा लगाकर सीएम योगी ने सभी प्रदेशवासियों को इस दिवस की शुभकामनाएं दीं।

‘The Politics Again’ की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि “पर्यावरण बचेगा तो प्रकृति बचेगी, और प्रकृति बचेगी तो जीव सृष्टि भी बचेगी।”

उन्होंने हर नागरिक से मातृभूमि के प्रति ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपील की।

9 साल में 242 करोड़ पौधे: चुनौतियों से सफलता तक का सफर

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेश सरकार की पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से डबल इंजन सरकार ने 2017 में सत्ता संभालते ही वन महोत्सव पर 5 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य रखा था।

  • शुरुआती चुनौतियां: उस समय सरकार के पास न तो पर्याप्त नर्सरी थीं और न ही इतने बड़े अभियान का अनुभव।

  • ऐतिहासिक उपलब्धि: वन एवं अन्य विभागों के अथक प्रयासों से पिछले 9 वर्षों के भीतर प्रदेश में 242 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं, जिससे उत्तर प्रदेश का फॉरेस्ट कवर (हरित क्षेत्र) उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है।

‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’

सीएम योगी ने प्रभु श्रीराम के उद्घोष का जिक्र करते हुए कहा कि ‘जननी (मां) और जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान हैं।’

उन्होंने कहा कि प्रकृति और मातृभूमि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए ही पीएम मोदी ने तीन वर्ष पहले ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की शुरुआत की थी। इसी क्रम में यूपी में भी यह पौधारोपण महाभियान बड़े स्तर पर चलाया जा रहा है।

प्लास्टिक मुक्त यूपी और ‘माटी कला’ को बढ़ावा

पर्यावरण की चुनौतियों (ग्लोबल वार्मिंग, क्लाइमेट चेंज) से निपटने के लिए यूपी सरकार केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है।

  • सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रहार: सरकार गांव, शहर और प्रदेश को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

  • माटी कला बोर्ड: प्लास्टिक के विकल्प के रूप में मिट्टी के बर्तनों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘माटी कला बोर्ड’ की स्थापना की गई है।

  • कुम्हारों को मदद: अप्रैल से जून तक हर गांव व शहर के तालाबों से प्रजापति व कुम्हार समाज को निशुल्क मिट्टी उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही, उन्हें काम में आसानी के लिए सोलर और इलेक्ट्रिक चाक भी बांटे गए हैं।

रेन वॉटर हार्वेस्टिंग हुई अनिवार्य

जल संरक्षण के मोर्चे पर भी सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। विकास प्राधिकरणों ने अब तय क्षेत्रफल से बड़े आवासीय भवनों और कमर्शियल परिसरों (Commercial Complexes) के लिए ‘रेन वॉटर हार्वेस्टिंग’ (वर्षा जल संचयन) प्रणाली लगाना पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया है।