अब टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर गिरफ्तारी की तलवार: एमपी हाईकोर्ट ने अरेस्ट वारंट से हटाई रोक, पुलिस कर सकती है गिरफ्तार “
भोपाल/कोलकाता: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें अचानक बहुत बढ़ गई हैं।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर लगी अंतरिम रोक को रद्द कर दिया है।
कोर्ट के इस सख्त फैसले के बाद अब मध्य प्रदेश (MP) पुलिस अभिषेक बनर्जी को कभी भी गिरफ्तार कर सकती है।
क्यों कैंसिल हुआ अभिषेक बनर्जी का अरेस्ट वारंट?
यह मामला मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित एमपी-एमएलए (MP-MLA) कोर्ट में चल रहा था। इस विशेष अदालत ने 12 नवंबर 2025 को अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई थी।
अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस रोक को रद्द करते हुए आदेश की एक कॉपी तुरंत ट्रायल कोर्ट को भेजने का निर्देश दिया है।
दरअसल, हाई कोर्ट में अभिषेक बनर्जी की ओर से लगाई गई याचिका की पैरवी करने के लिए उनके वकील ही अदालत नहीं पहुंचे।
इसके बाद हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के खिलाफ उनकी याचिका को सीधे खारिज कर दिया।
अटकलें तेज हैं कि अब एमपी पुलिस अभिषेक बनर्जी को गिरफ्तार करने के लिए जल्द ही कोलकाता रवाना हो सकती है।
क्या है पूरा मामला और ‘गुंडा’ टिप्पणी का विवाद?
अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी से संबंधित यह पूरा विवाद साल 2020 का है।
-
विवादित बयान: नवंबर 2020 में कोलकाता में आयोजित एक राजनीतिक जनसभा के दौरान टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने कथित तौर पर भाजपा नेता (पूर्व विधायक) आकाश विजयवर्गीय पर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की थी और उन्हें भरे मंच से ‘गुंडा’ कह दिया था।
-
मानहानि का केस: आकाश विजयवर्गीय ने इस बयान को अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा के खिलाफ और अपमानजनक बताते हुए साल 2021 में भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मानहानि का केस दायर कर दिया।
क्यों जारी हुआ था गिरफ्तारी वारंट?
भोपाल की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए अभिषेक बनर्जी को बार-बार समन जारी कर पेश होने का निर्देश दिया था।
लेकिन जब अभिषेक बनर्जी अदालत में उपस्थित नहीं हुए, तो कोर्ट ने उनके खिलाफ सीधे गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। इस कड़े रुख के बाद बनर्जी एमपी हाई कोर्ट पहुंचे थे।
तब उनके वकीलों ने दलील दी थी कि वह एक निर्वाचित सांसद हैं और उनके भागने की कोई संभावना नहीं है। हालांकि, अब वकीलों की गैरमौजूदगी के कारण हाई कोर्ट ने वह राहत भी छीन ली है।











