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विपक्ष में फूट: TMC-DMK संकट से NDA को मिलेगा बड़ा फायदा

विपक्ष में भारी फूट, TMC और DMK के संकट से NDA को संजीवनी: मानसून सत्र में ‘एक साथ चुनाव’ बिल लाने की तैयारी “

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के लिए संसद के भीतर और बाहर चुनौती बन रही विपक्षी एकजुटता अब ताश के पत्तों की तरह बिखरती नजर आ रही है।

विशेषकर महिला आरक्षण कानून में संशोधन विधेयक पर सरकार को घेरने वाले विपक्ष में अब भारी दरार आ गई है।

‘The Politics Again’ के राजनीतिक विश्लेषण के अनुसार, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का अभूतपूर्व विभाजन और तमिलनाडु में द्रविड मुनेत्र कषगम (DMK) एवं कांग्रेस के बीच बढ़ती दूरियों ने सत्ता पक्ष को एक नई और मजबूत राजनीतिक संजीवनी दे दी है।

TMC में 1998 के बाद का सबसे बड़ा विभाजन

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस अपने गठन (1998) के बाद के सबसे गहरे संकट से गुजर रही है।

पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने ममता बनर्जी के फैसले के खिलाफ जाकर ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता (नेता प्रतिपक्ष) चुन लिया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बगावत सिर्फ नेतृत्व शैली के खिलाफ नहीं है, बल्कि ममता के राजनीतिक उत्तराधिकारी अभिषेक बनर्जी के बढ़ते एकाधिकार और प्रभाव के खिलाफ एक खुला विद्रोह है।

अब पार्टी आलाकमान की सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या बंगाल की तरह दिल्ली में भी लोकसभा (28) और राज्यसभा (13) के सांसदों में टूट होगी? मानसून सत्र से पहले सांसदों को एकजुट रखना पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

DMK और कांग्रेस के रिश्तों में आई खटास

संसद में 185 सांसदों (कांग्रेस, सपा, TMC और DMK) का जो मजबूत गुट सरकार के खिलाफ खड़ा था, वह अब कमजोर पड़ गया है।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने DMK से अपनी राहें अलग कर ली हैं और विजय के नेतृत्व वाली ‘तमिलगा वेत्रि कषगम’ (TVK) सरकार के साथ गठबंधन कर लिया है।

इस नई राजनीतिक चुनौती के बीच DMK की सीधी टक्कर अब कांग्रेस की सहयोगी TVK से है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि DMK अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए केंद्र सरकार के प्रति अपनी पुरानी आक्रामक नीति को छोड़कर अधिक व्यावहारिक और नरम रुख अपना सकती है।

8 जून की विपक्षी बैठक पर लटकी तलवार

विपक्ष के इस बिखराव के बीच 8 जून को विपक्षी गठबंधन की एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। सूत्रों के मुताबिक, ममता और अभिषेक बनर्जी इस बैठक में शामिल होकर समर्थन जुटाने की कोशिश करेंगे, लेकिन DMK ने अब तक इसमें शामिल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इससे विपक्षी एकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

NDA का बढ़ा आत्मविश्वास, बड़े बिल लाने की तैयारी

विपक्षी खेमे में मचे इस घमासान और हालिया विधानसभा चुनावों में मिली मजबूत स्थिति ने केंद्र की मोदी सरकार का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा दिया है।

सरकार अब इस राजनीतिक अवसर का लाभ उठाते हुए संसद के आगामी मानसून सत्र में ‘एक साथ चुनाव’ (One Nation, One Election) जैसे अपने महत्वाकांक्षी विधायी कार्यक्रमों को तेजी से पास कराने की तैयारी में है।

महाराष्ट्र के कुछ विपक्षी सांसदों के सत्ता पक्ष के पाले में जाने की अटकलों ने विपक्ष की बेचैनी को और बढ़ा दिया है।

यदि विपक्ष ने जल्द अपने मतभेद नहीं सुलझाए, तो राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा की राह पूरी तरह से आसान हो जाएगी।