सऊदी ने मक्का के पास मार गिराया ड्रोन, लालसागर में कब्जे से तनाव
मक्का के आसमान में मंडराया ड्रोन का खतरा, सऊदी ने किया नष्ट; हूतियों के हमलों से लाल सागर और यमन में तनाव चरम पर”
रियाद: संतोष सेठ, संपादक (THE POLITICS AGAIN)
मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। सऊदी अरब ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही एक ड्रोन को मार गिराया है।
सऊदी सैन्य प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि मक्का और दोनों पवित्र मस्जिदों की सुरक्षा उनके लिए ‘रेड लाइन’ है।
हालांकि, यमन के हूती विद्रोहियों ने मक्का को निशाना बनाने के सऊदी आरोप को ‘बेबुनियाद’ करार दिया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब हूती विद्रोहियों और सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच सैन्य संघर्ष अपने चरम पर है।
हूतियों का दावा: सऊदी लड़ाकू विमानों ने किए 52 हवाई हमले
मक्का की घटना से ठीक पहले, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरिया ने दावा किया था कि सऊदी एफ-15 और टाइफून लड़ाकू विमानों ने यमन के पांच प्रांतों (तैज, अल-जौफ, अल-बायदा, सादा और अमरान) में 52 हवाई हमले किए हैं।
हूतियों का आरोप है कि इन हमलों में स्कूलों और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें तैज प्रांत में दो बच्चों सहित तीन नागरिकों की मौत हो गई। हूतियों ने सऊदी अरब को इन हमलों का कड़ा जवाब देने की धमकी दी है।
रणनीतिक मोखा और मायून द्वीप पर हूतियों का कब्जा, तेल आपूर्ति पर संकट
सऊदी अरब के लिए सबसे बड़ी चिंता हूतियों की नई सैन्य बढ़त है। हूतियों ने रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य में स्थित मायून द्वीप पर कब्जा कर लिया है।
बाब अल-मंदब एशिया की ओर जाने वाले सऊदी तेल निर्यात का मुख्य मार्ग है। इसके साथ ही, इराक स्थित ईरान समर्थित मिलिशिया द्वारा सऊदी की महत्वपूर्ण ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ को नुकसान पहुंचाने की भी खबरें हैं, जिससे प्रतिदिन कई मिलियन बैरल तेल की आपूर्ति ठप हो सकती है।
सऊदी क्राउन प्रिंस ने मिस्र से मांगा समर्थन
बढ़ते क्षेत्रीय संकट और सीमा-पार हमलों के बीच सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने मंगलवार को काहिरा में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी से मुलाकात की।
दोनों नेताओं ने लाल सागर और बाब अल-मंदब में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई।
मिस्र ने सऊदी अरब को अपना ‘अटूट समर्थन’ दिया है। स्वेज नहर के यातायात में गिरावट के कारण मिस्र भी हूती हमलों से आर्थिक रूप से प्रभावित हुआ है।
यमन में गहराता मानवीय संकट और संयुक्त राष्ट्र की चिंता
इस युद्ध की सबसे बड़ी कीमत यमन की आम जनता चुका रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में ही 500 से अधिक लोगों की मौत हुई है और करीब 94,000 लोग विस्थापित हुए हैं।
संयुक्त राष्ट्र में यमन के राजदूत अब्दुल्ला अल-सादी ने सुरक्षा परिषद में हूतियों पर हथियार प्रतिबंध सख्ती से लागू करने की अपील की है।
अब देखना यह है कि सऊदी अरब इस दोहरे संकट (लाल सागर की सुरक्षा और शहरों पर ड्रोन हमले) से निपटने के लिए कूटनीति का रास्ता चुनता है या बड़े सैन्य अभियान का जोखिम उठाता है।











