कोलकाता तारातला हादसा: सेना ने उतारा ‘रेस्क्यू रडार’
कोलकाता तारातला हादसा: मलबे में जिंदगियां तलाशने के लिए सेना ने उतारा ‘रेस्क्यू रडार’, NDRF के स्निफर डॉग्स भी अभियान में शामिल”
कोलकाता: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
तारातला इलाके में एक निर्माणाधीन गोदाम के ढहने के बाद वहां बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान जारी है।
हादसे के बाद भारी मात्रा में कंक्रीट, लोहे के गार्डर और निर्माण सामग्री के नीचे कई लोगों के फंसे होने की आशंका है।
‘The Politics Again’ की रिपोर्ट के अनुसार, मलबे के भीतर अंधेरे, संकरी जगह और भारी ढांचागत अवरोधों के कारण पारंपरिक तरीकों से खोज अभियान चलाने में आ रही चुनौतियों को देखते हुए, अब भारतीय सेना (Indian Army) ने अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
सेना, एनडीआरएफ (NDRF), दमकल और पुलिस की संयुक्त टीमें चौबीसों घंटे इस रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं।
सेना का ‘रेस्क्यू रडार’ करेगा मलबे के अंदर की हलचल ट्रेस
मलबे के नीचे फंसे संभावित लोगों की सटीक लोकेशन तलाशने के लिए सेना ने घटनास्थल पर विशेष ‘रेस्क्यू रडार’ (Rescue Radar) तैनात किया है। फोर्ट विलियम के सूत्रों के अनुसार, यह तकनीक बेहद कारगर है:
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कैसे करता है काम: यह मशीन मलबे के ऊपर स्थापित की जाती है। यह मलबे के भीतर मौजूद किसी भी प्रकार की गतिविधि और संभावित मानव उपस्थिति का पता लगाने में पूरी तरह सक्षम है।
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स्क्रीन पर मिलती है जानकारी: यह रडार मलबे के भीतर की तस्वीरें और जीवन के संकेत सीधे डिस्प्ले स्क्रीन पर उपलब्ध कराता है।
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सुरक्षित रेस्क्यू: जहां भी किसी व्यक्ति के फंसे होने की संभावना रडार पर दिखाई देती है, वहां बचावकर्मी विशेष सावधानी के साथ कंक्रीट और लोहे के ढांचे को काटने का काम शुरू करते हैं।
उत्तरकाशी सुरंग हादसे में भी हुआ था इस्तेमाल सेना के अधिकारियों ने बताया कि इस अत्याधुनिक रडार तकनीक का सफल उपयोग उत्तराखंड के ‘उत्तरकाशी सुरंग हादसे’ के दौरान भी किया गया था। वहां इसके जरिए मलबे में फंसे 41 श्रमिकों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण मदद मिली थी। तारातला हादसे में भी इसी तकनीक से जीवन के संकेत तलाशे जा रहे हैं।
अभियान का अहम हिस्सा बने NDRF के ‘स्निफर डॉग्स’
तकनीक के साथ-साथ जानवरों की अद्भुत सूंघने की क्षमता का भी इस बचाव अभियान में पूरा उपयोग किया जा रहा है।
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एनडीआरएफ (NDRF) की टीमों ने बुधवार दोपहर से विशेष रूप से प्रशिक्षित बेल्जियन मेलिनोइस (Belgian Malinois) नस्ल के खोजी कुत्तों (Sniffer Dogs) को अभियान में लगाया है।
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इन स्निफर डॉग्स को आपदा प्रबंधन (Disaster Management) और कठिन खोज-बचाव कार्यों के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
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बचाव दल को उम्मीद है कि इनकी सहायता से मलबे के नीचे फंसे लोगों की लोकेशन का जल्द पता लगाने में मदद मिलेगी।
आखिरी व्यक्ति के मिलने तक जारी रहेगा अभियान
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक मलबे के एक-एक हिस्से की पूरी तरह से तलाशी नहीं हो जाती, तब तक राहत एवं बचाव अभियान बिना रुके जारी रहेगा।
बचावकर्मियों का एकमात्र लक्ष्य मलबे के नीचे फंसे हर व्यक्ति तक जल्द से जल्द पहुंचना और अधिक से अधिक जिंदगियां बचाना है।











