“देश की आंतरिक सुरक्षा को अभेद्य बनाने के संकल्प के साथ नई दिल्ली में दो दिवसीय ‘आतंकवाद निरोधी सम्मेलन’ (Anti-Terror Conference 2025) का आगाज़ हुआ”
नई दिल्ली 27 / 12 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए ‘टीम इंडिया’ के रूप में आतंकवाद पर 360 डिग्री प्रहार करने का रोडमैप पेश किया।
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत भारत अब आतंकवाद के प्रति कोई नरम रुख नहीं अपनाएगा। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन केवल चर्चा का मंच नहीं है, बल्कि एक ऐसा ‘एक्शनेबल प्लेटफॉर्म’ है जहाँ से निकलने वाले बिंदुओं पर देशभर की एजेंसियां सालभर काम करती हैं।
तकनीक के बदलते परिदृश्य को देखते हुए गृह मंत्री ने सुरक्षा बलों को तीन नए डिजिटल हथियार सौंपे:
अपडेटेड एनआईए अपराध मैनुअल: आधुनिक जांच और कानूनी प्रक्रियाओं को समाहित करते हुए नई गाइडलाइंस।
आयुध ई-डेटाबेस (Weapon Database): अवैध हथियारों के नेटवर्क को ट्रैक करने के लिए देश का पहला एकीकृत ई-डेटाबेस।
संगठित अपराध नेटवर्क डेटाबेस: विदेशों में बैठे गैंगस्टरों और आतंकी आकाओं के गठजोड़ को उजागर करने वाला डेटाबेस।
अमित शाह ने पहलगाम (बैसरन गाटी) में हुए आतंकी हमले की जांच का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला।
सटीक कार्रवाई: उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से साजिशकर्ताओं को और ‘ऑपरेशन महादेव’ से हमलावर आतंकियों को न्यूट्रलाइज किया गया।
अंतरराष्ट्रीय घेराबंदी: गृह मंत्री ने कहा कि पहलगाम और दिल्ली विस्फोट मामलों की ‘वाटरटाइट’ जांच आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा कर देगी।
सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी पर प्रहार करते हुए शाह ने कहा:
“बिना साझा किया गया डेटा, बिना गोली की बंदूक जैसा है। अब समय ‘Need to Know’ (जरूरत पड़ने पर बताना) का नहीं, बल्कि ‘Duty to Share’ (साझा करने का कर्तव्य) का है।”
उन्होंने सभी राज्यों के डीजीपी को निर्देश दिया कि वे NIDAAN और NATGRID जैसे पोर्टल्स का अनिवार्य उपयोग करें और NIA द्वारा तैयार किए गए ‘कॉमन एटीएस स्ट्रक्चर’ को तुरंत लागू करें।
जैसे-जैसे भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन रहा है, चुनौतियां भी जटिल हो रही हैं। गृह मंत्री ने चेतावनी दी कि:
आर्थिक सुरक्षा: बढ़ते अर्थतंत्र के साथ आर्थिक नेटवर्क के दुरुपयोग और हाइब्रिड आतंकवाद का खतरा बढ़ेगा।
ट्रायल-इन-एब्सेंटिया: विदेशों में छिपे भगोड़े आतंकियों को वापस लाने के लिए उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने की प्रक्रिया (Trial-in-Absentia) को बिना डरे आगे बढ़ाया जाएगा।
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