NSA Ajit Doval addressing the students during the convocation ceremony at IIT Roorkee

NSA डोभाल का खुलासा: जब चीनी सेना ने पकड़े एजेंट, लगा करियर खत्म

NSA अजीत डोभाल ने खोला शुरुआती करियर का राज: जब चीन ने पकड़ लिए थे भारतीय एजेंट, लगा खत्म हो गया करियर”

रुड़की: संतोष सेठ की रिपोर्ट : (THE POLITICS AGAIN)

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने शनिवार को आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।

नवस्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने अपने शुरुआती करियर का एक ऐसा गहरा राज साझा किया, जिसने एक समय उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया था कि उनका करियर अब खत्म हो गया है।

उन्होंने 1970 के दशक में सिक्किम के भारत में विलय के दौरान के अपने एक खुफिया मिशन और चीनी सेना (PLA) से जुड़े एक बड़े घटनाक्रम को याद किया।

सिक्किम मिशन और जब चीनी हिरासत में फंसे भारतीय एजेंट

अजीत डोभाल ने बताया कि 1970 के दशक में जब वह महज 20-22 वर्ष के युवा आईपीएस अधिकारी थे, तब उन्हें सिक्किम में इंटेलिजेंस का प्रभारी बनाया गया था।

उनका मुख्य काम सीमावर्ती इलाकों की निगरानी करना और चीनी सेना (PLA) की गतिविधियों पर नजर रखना था। इस दौरान उन्होंने सीमावर्ती इलाके में खुफिया जानकारी जुटाने के लिए अपनी एक टीम भेजी थी, जिसे 8 दिन में लौटना था।

लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी कोई खबर नहीं आई। बाद में मुख्यालय से फोन आया और पता चला कि उस टीम को चीनी सेना ने पकड़ लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।

हालांकि राजनयिक वार्ताओं के बाद एजेंटों को रिहा करा लिया गया, लेकिन वे शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुके थे।

‘मुझे लगा कि मेरा करियर अब खत्म हो गया है’

इस नाकामी के बाद पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच बैठाई गई। डोभाल ने अपने उस समय के डर को साझा करते हुए कहा, “मुझे लगा कि यह मेरे करियर का अंत है और अब मुझे कोई नया काम शुरू करना पड़ेगा।”

हालांकि, जांच समिति ने उन्हें पूरी तरह ‘क्लीन चिट’ दे दी। जांच में यह साबित हुआ कि डोभाल की कोई गलती नहीं थी, बल्कि मुख्यालय द्वारा टीम को दिए गए स्केच और नक्शों में ही खामियां थीं।

तिब्बती शेरपा की ‘मैप रीडिंग’ वाली सबसे बड़ी सीख

क्लीन चिट मिलने के बावजूद डोभाल अंदर से हिले हुए थे। ऐसे समय में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के उनके एक बुजुर्ग तिब्बती शेरपा साथी ने उन्हें जीवन की सबसे बड़ी सीख दी।

शेरपा ने उनसे कहा कि “जिंदगी बस मैप रीडिंग का खेल है।” शेरपा ने उन्हें जीवन के लिए तीन मूल मंत्र दिए:

  1. जानो कि तुम अभी कहां हो।

  2. जानो कि तुम्हें जाना कहां है।

  3. वहां तक पहुंचने का सही रास्ता और वापसी का रास्ता खोजो। डोभाल ने कहा कि शेरपा की यह सीख उनके जीवन को देखने का नजरिया बन गई।

“आप 1,000 सालों की सबसे भाग्यशाली पीढ़ी हैं”

युवाओं को प्रेरित करते हुए एनएसए ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी पिछले एक हजार सालों के इतिहास में सबसे भाग्यशाली पीढ़ी है।

पुरानी पीढ़ियों ने जहां गुलामी और बेहद सीमित संसाधनों में अपना जीवन संघर्ष में बिताया, वहीं आज के युवाओं के पास भारत और दुनिया भर में अपार अवसर मौजूद हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाले समय में तकनीक ही किसी भी देश की प्रगति का सबसे बड़ा जरिया बनेगी, इसलिए युवाओं को इन अवसरों का पूरा लाभ उठाना चाहिए।