साजो-सामान के साथ मंगोलिया के लिए रवाना होती भारतीय सेना की टुकड़ी

भारतीय सेना ‘खान क्वेस्ट 2026’ सैन्य अभ्यास के लिए मंगोलिया रवाना

मंगोलिया में गूंजेगा भारतीय सेना का शौर्य: ‘खान क्वेस्ट 2026’ बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास के लिए रवाना हुई टुकड़ी “

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट 

वैश्विक शांति और सुरक्षा के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को एक बार फिर साबित करते हुए भारतीय सेना की एक विशेष टुकड़ी गुरुवार को बहुपक्षीय संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘खान क्वेस्ट’ (Khaan Quest) में भाग लेने के लिए रवाना हो गई है।

यह प्रतिष्ठित अभ्यास मंगोलिया की राजधानी उलानबातर के ‘फाइव हिल्स ट्रेनिंग एरिया’ में आयोजित किया जा रहा है, जहां दुनिया भर की सैन्य ताकतें एक मंच पर आकर शांति स्थापना का अभ्यास करेंगी।

अभ्यास ‘खान क्वेस्ट 2026’ की एक झलक

विवरण

जानकारी

अभ्यास का नाम

खान क्वेस्ट (Khaan Quest)

संस्करण

23वां

आयोजन तिथि

20 जून से 3 जुलाई 2026

स्थान

फाइव हिल्स ट्रेनिंग एरिया, उलानबातर (मंगोलिया)

भारतीय दल

40 जवान (मुख्य रूप से जाट रेजिमेंट)

मुख्य उद्देश्य

संयुक्त राष्ट्र चार्टर (अध्याय VII) के तहत शांति समर्थन

 

जाट रेजिमेंट के जवान दिखाएंगे दमखम

भारतीय दल में 40 सैन्यकर्मी शामिल हैं, जिनमें मुख्य रूप से भारतीय सेना की गौरवशाली ‘जाट रेजिमेंट’ की एक बटालियन के जवान हैं।

इनके साथ अन्य सशस्त्र बलों और सेवाओं के विशेषज्ञ भी मंगोलिया गए हैं। यह भागीदारी न केवल भारत की सैन्य ताकत को दर्शाती है, बल्कि मंगोलिया के साथ भारत की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूती प्रदान करती है।

क्या है ‘खान क्वेस्ट’ का इतिहास?

इस सैन्य अभ्यास की शुरुआत सबसे पहले साल 2003 में अमेरिका और मंगोलियाई रक्षा बलों के बीच एक द्विपक्षीय कार्यक्रम के रूप में हुई थी।

इसके सफल परिणामों को देखते हुए, वर्ष 2006 से इसे एक ‘बहुपक्षीय शांतिरक्षा अभ्यास’ में बदल दिया गया। वर्तमान में आयोजित होने वाला यह इसका 23वां संस्करण है। ज्ञात हो कि इसका पिछला संस्करण भी जून 2025 में मंगोलिया में ही संपन्न हुआ था।

किन सामरिक अभ्यासों पर रहेगा जोर?

‘खान क्वेस्ट’ का मुख्य उद्देश्य भाग लेने वाले देशों की सेनाओं को बहुपक्षीय वातावरण में शांतिरक्षा अभियानों (Peacekeeping Operations) के लिए तैयार करना है। इस दौरान निम्नलिखित संयुक्त योजना और सामरिक अभ्यासों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा:

  • स्थिर और गतिशील चेक-पॉइंट (नाके) स्थापित करना।

  • संदिग्ध इलाकों में घेराबंदी और सघन तलाशी अभियान।

  • शत्रु क्षेत्रों या संघर्ष क्षेत्रों से आम नागरिकों की सुरक्षित निकासी।

  • तात्कालिक विस्फोटक उपकरणों (IED) को निष्क्रय करने और उनका मुकाबला करने का अभ्यास।

  • विपरीत परिस्थितियों में गश्त (Patrolling), प्राथमिक चिकित्सा और घायलों को सुरक्षित निकालना।

अंतरराष्ट्रीय सौहार्द और भाईचारे को मिलेगा बढ़ावा

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह अभ्यास भाग लेने वाले देशों के सैनिकों को संयुक्त अभियानों के संचालन के लिए अपनी सर्वोत्तम रणनीतियों, तकनीकों और प्रक्रियाओं (SOPs) को साझा करने का एक बेहतरीन अवसर प्रदान करेगा।

इससे न केवल सेनाओं के बीच ‘ऑपरेशनल तत्परता’ बढ़ेगी, बल्कि विभिन्न देशों के जवानों के बीच सौहार्द और वैश्विक भाईचारे की भावना भी मजबूत होगी।