Inauguration of the 15-day workshop in Udupi focused on transliterating ancient Ayurveda manuscripts in Tigalari and Kannada scripts

भारत की आयुर्वेद ज्ञान विरासत को बचाने की बड़ी पहल

🌿आयुर्वेद के ‘प्राचीन खजाने’ को बचाने की बड़ी पहल: उडुपी में शुरू हुई 15 दिवसीय कार्यशाला, तिगलारी और कन्नड़ पांडुलिपियों का होगा लिप्यंतरण”

उडुपी (कर्नाटक): द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारत की पारंपरिक और सदियों पुरानी ज्ञान विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है।

भारत की अमूल्य आयुर्वेद पांडुलिपियों (Ayurveda Manuscripts) को सहेजने के लिए उडुपी के श्री पुथिगे नरसिम्हा सभाभवन (गीता मंदिर) में सोमवार को एक विशेष 15 दिवसीय क्षमता-निर्माण कार्यशाला का उद्घाटन किया गया।

‘The Politics Again’ की इस रिपोर्ट में आइए जानते हैं कि इस खास कार्यशाला का उद्देश्य क्या है और कैसे यह भारत के अप्रकाशित आयुर्वेद ग्रंथों को दुनिया के सामने लाएगी:

📜’तिगलारी’ और ‘प्राचीन कन्नड़’ लिपियों पर है खास फोकस

यह 15 दिवसीय कार्यशाला भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अधीन सीसीआरएएस (CCRAS) और शिक्षा मंत्रालय के केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (CSU) द्वारा ‘श्री वदिराजा अनुसंधान फाउंडेशन’ के सहयोग से संयुक्त रूप से आयोजित की जा रही है।

  • उद्देश्य: इस पहल का मुख्य उद्देश्य कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में प्रमुखता से पाई जाने वाली ‘तिगलारी’ (Tigalari) और प्राचीन कन्नड़ लिपियों में मौजूद आयुर्वेद पांडुलिपियों को पढ़ना, समझना और उन्हें नई लिपियों में बदलना (लिप्यंतरण) है।

  • इसके जरिए युवा विद्वान दुर्लभ और अप्रकाशित आयुर्वेद ग्रंथों के प्रकाशन की दिशा में काम करेंगे।

🏛️ ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत हो रहा है यह महायज्ञ

कार्यशाला का भव्य उद्घाटन सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रोफेसर वैद्य रबीनारायण आचार्य ने किया।

  • अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि यह पहल भारत सरकार के ‘ज्ञान भारतम मिशन’ का एक अहम हिस्सा है, जो देश की समृद्ध ज्ञान परंपराओं को सहेजने के लिए शुरू किया गया है।

  • इस कार्यक्रम को श्री पुथिगे मठ के पीठाधिपति श्री श्री सुगुनेन्द्र तीर्थ श्रीपाद और कनिष्ठ पीठाधिपति श्री श्री सुश्रीन्द्र तीर्थ श्रीपाद के आशीर्वाद से संचालित किया जा रहा है।

🧑‍🎓 युवा विद्वान सीखेंगे अप्रकाशित ग्रंथों के रहस्य

इस 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में आयुर्वेद और संस्कृत पृष्ठभूमि के युवा विद्वानों को विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करने का मौका मिलेगा।

  • वे अप्रकाशित आयुर्वेद पांडुलिपियों को समझेंगे, उनका लिप्यंतरण (Transliteration) करेंगे और उन्हें संपादित कर प्रकाशन के लिए तैयार करेंगे।

  • तीसरी कार्यशाला: सीसीआरएएस और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की जा रही यह तीसरी कार्यशाला है।

  • इससे पहले ओडिशा के पुरी में (करणी/देवनागरी लिपि) और केरल के गुरुवायूर में (वट्टेझुथु/मलयालम लिपि) कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी हैं।

📚 प्रकाशन के लिए तैयार होंगी पांडुलिपियां

इस कार्यशाला में श्री धर्मस्थल मंजुनाथेश्वर आयुर्वेद महाविद्यालय (उडुपी और हसन) के संकाय सदस्य व छात्र, और श्री पुथिगे मठ के गुरुकुल के संस्कृत छात्र हिस्सा ले रहे हैं।

इस 15 दिवसीय कार्यक्रम के दौरान तैयार की गई लिप्यंतरित पांडुलिपियों का उपयोग बाद में सीसीआरएएस (CCRAS) और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशन के लिए किया जाएगा, जिससे भारत का प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान पूरी दुनिया तक पहुंच सकेगा।

नोट: भारत की सांस्कृतिक और ज्ञान विरासत, आयुर्वेद क्षेत्र के नए अनुसंधान और आयुष मंत्रालय की हर बड़ी पहल के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।

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