कांग्रेस में बड़ा बदलाव: यूपी, हरियाणा, ओडिशा के प्रभारी बदले गए
कांग्रेस का बड़ा संगठनात्मक बदलाव: यूपी, हरियाणा और ओडिशा के लिए नए प्रभारियों की नियुक्ति, जानें 2027 के लिए क्या है पार्टी का मास्टरप्लान”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
आगामी चुनावों की रणनीतियों को धार देने और पार्टी के जमीनी संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से कांग्रेस आलाकमान ने संगठन में बड़े बदलाव किए हैं।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की संस्तुति के बाद उत्तर प्रदेश, हरियाणा और ओडिशा के लिए नए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) प्रभारियों की नियुक्ति कर दी गई है। यह सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।
किसे मिली कहाँ की जिम्मेदारी?
पार्टी की ओर से जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, तीन महत्वपूर्ण राज्यों की कमान नए चेहरों को सौंपी गई है:
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उत्तर प्रदेश: राजेंद्र पाल गौतम
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ओडिशा: लालजी देसाई
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हरियाणा: संजय दत्त
पुराने प्रभारियों के काम की हुई सराहना
संगठन में इस फेरबदल के साथ ही, कांग्रेस ने पूर्व प्रभारियों के कार्यों की भी प्रशंसा की है। आधिकारिक लेटर में उत्तर प्रदेश के निवर्तमान प्रभारी अविनाश पांडे के योगदान की खास तौर पर तारीफ की गई है।
इसके अतिरिक्त, बी. के. हरिप्रसाद और अजय कुमार लल्लू द्वारा पार्टी के लिए किए गए काम की भी सराहना की गई है।
नए प्रभारियों पर अब इन राज्यों में चुनावी तैयारियों को रफ्तार देने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
यूपी में 2027 की तैयारी: राजेंद्र पाल गौतम की नियुक्ति के सियासी मायने
इस पूरे संगठनात्मक फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा उत्तर प्रदेश को लेकर हो रही है। यूपी में राजेंद्र पाल गौतम की नियुक्ति को एक बड़े सियासी दांव के तौर पर देखा जा रहा है।
राजेंद्र पाल गौतम दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में वह AICC के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। अनुसूचित समाज (दलित वर्ग) में राजेंद्र पाल गौतम की मजबूत पकड़ और उनकी मुखर पहचान को देखते हुए यह माना जा रहा है कि कांग्रेस ने यह कदम दलित वोटर्स को साधने के लिए उठाया है।
लंबे समय से यूपी में अपने खोए हुए जनाधार को वापस पाने की जद्दोजहद कर रही कांग्रेस अब एक नई स्ट्रैटेजी पर काम कर रही है।
कांग्रेस की सोशल इंजीनियरिंग को मिलेगी नई धार
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से सबसे अहम राज्य में कांग्रेस लंबे वक्त से संगठनात्मक कमजोरी की चुनौती का सामना कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजेंद्र पाल गौतम को प्रभारी बनाकर कांग्रेस ने सोशल इंजीनियरिंग साधने के साथ-साथ पार्टी कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा देने का प्रयास किया है।
दूसरी ओर, ओडिशा और हरियाणा में लालजी देसाई और संजय दत्त की नियुक्ति को भी संगठन विस्तार की रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
अब राजनीतिक गलियारों में सभी की निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि यह नए प्रभारी अपने-अपने राज्यों में संगठन को कितना सक्रिय कर पाते हैं और आने वाले अहम चुनावों में कांग्रेस को इसका कितना सियासी फायदा मिलता है।











