Bangladesh PM Tarique Rahman and Chinese PM Li Qiang shaking hands after signing bilateral agreements in Beijing

चीन-बांग्लादेश के बीच हुआ बड़ा समझौता, भारत की बढ़ी टेंशन

चीन-बांग्लादेश के बीच ‘तीस्ता नदी’ प्रबंधन पर ऐतिहासिक समझौता: भारत के ‘चिकन नेक’ के पास बढ़ी रणनीतिक हलचल, जानें इसके मायने”

बीजिंग / नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

दक्षिण एशिया की भू-राजनीति (Geopolitics) में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है।

‘The Politics Again’ की रिपोर्ट के अनुसार, चीन और बांग्लादेश ने संवेदनशील ‘तीस्ता नदी प्रबंधन और पुनरुद्धार’ पर सहयोग के लिए औपचारिक सहमति जता दी है।

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की पांच दिवसीय चीन यात्रा के दौरान बृहस्पतिवार को बीजिंग के ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में दोनों देशों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई।

वार्ता के बाद चीनी प्रधानमंत्री ली क्विंग और पीएम रहमान की मौजूदगी में संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए 13 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

इस कदम ने नई दिल्ली के कूटनीतिक गलियारों में चिंता की लकीरें खींच दी हैं।

तीस्ता मास्टर प्लान: क्या हैं समझौते के मुख्य बिंदु?

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता महदी अमीन के अनुसार, चीन के जल संसाधन मंत्री ली गुओयिंग और पीएम रहमान के बीच हुई बैठक में जल प्रबंधन को लेकर व्यापक सहमति बनी है। इसके तहत:

  • नदी प्रबंधन और गाद निकासी: दोनों देश तीस्ता मास्टर प्लान के तहत बाढ़ के जोखिम को कम करने, नदी से गाद (Dredging) निकालने और नदी कटाव को रोकने के लिए मिलकर काम करेंगे।

  • विशाल कार्ययोजना: बांग्लादेश ने अगले 5 वर्षों में 20,000 किलोमीटर लंबी नदियों (विशेषकर पद्मा और तीस्ता) और नहरों से गाद निकालने की योजना तैयार की है।

  • तकनीकी मदद: ढाका ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए पर्यावरण रक्षा और जल संसाधनों के सही प्रबंधन हेतु चीन से तकनीकी और आर्थिक सहायता मांगी है।

भारत के लिए क्यों बज रही है खतरे की घंटी?

तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर भारत (सिक्किम और पश्चिम बंगाल) से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है। यह समझौता भारत के लिए कई मोर्चों पर रणनीतिक और कूटनीतिक चुनौतियां खड़ी कर रहा है:

  1. सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) की संवेदनशीलता: चीन द्वारा संचालित यह परियोजना भारत के अति-संवेदनशील ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ के बेहद करीब स्थित होगी।

  2. यह मात्र 22 किलोमीटर चौड़ा संकरा गलियारा है जो भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है। यहाँ चीन की मौजूदगी भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है।

  3. भारत की पेशकश को नजरअंदाज करना: भारत ने इसी साल (2024) तीस्ता बेसिन के लिए अपनी ओर से तकनीकी और संरक्षण सहायता की पेशकश की थी। बांग्लादेश का भारत के बजाय चीन को चुनना, ढाका पर बीजिंग के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।

  4. गंगा जल संधि की समाप्ति: भारत और बांग्लादेश के बीच पानी का बंटवारा हमेशा से एक जटिल मुद्दा रहा है।

  5. 1996 में गंगा नदी के जल बंटवारे को लेकर हुई 30 साल की ऐतिहासिक संधि की मियाद इसी वर्ष समाप्त हो रही है। ऐसे में तीस्ता पर चीन की एंट्री बातचीत के समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

कूटनीतिक सौदेबाजी: ‘वन चाइना’ और ‘BRI’ पर जोर

इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने एक-दूसरे के कूटनीतिक हितों का खुलकर समर्थन किया है।

  • चीन का प्रस्ताव: चीनी प्रधानमंत्री ली क्विंग ने ‘बेल्ट एंड रोड’ (BRI) इनिशिएटिव को और मजबूत करने, बांग्लादेश में बड़ा निवेश करने और डिजिटल अर्थव्यवस्था (AI), नई ऊर्जा व संचार जैसे उभरते उद्योगों में सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।

  • बांग्लादेश का रुख: बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान ने स्पष्ट किया कि चीन के साथ संबंध विकसित करना ढाका की ‘विदेश नीति की सर्वोच्च प्राथमिकता’ है।

  • उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि उनका देश ‘एक चीन’ (One China) सिद्धांत का सख्ती से पालन करता है और ‘ताइवान की आज़ादी’ का कड़ा विरोध करता है।

आगे का कार्यक्रम

मलेशिया के कुआलालंपुर से 22 जून को चीन के डालियान शहर (विश्व आर्थिक मंच में हिस्सा लेने) पहुंचे पीएम रहमान बुधवार को हाई-स्पीड ट्रेन से बीजिंग आए थे।

स्वदेश रवाना होने से पहले शुक्रवार को उनका चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग (Xi Jinping) से मुलाकात करने का अहम कार्यक्रम है, जिस पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं।