US Iran Peace Talks

अमेरिका-ईरान में शांति वार्ता शुरू, ट्रंप की चेतावनी और ईरान की शर्तें

कूटनीति का केंद्र बना इस्लामाबाद: अमेरिका-ईरान में ऐतिहासिक शांति वार्ता शुरू, ट्रंप-वेंस की चेतावनी और ईरान की कड़ी शर्तें 

इस्लामाबाद/नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

मध्य-पूर्व (Middle East) में चल रहे भीषण संघर्ष को समाप्त करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था व आपूर्ति श्रृंखला को मंदी से बचाने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद अब ग्लोबल कूटनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है।

शुक्रवार देर रात ईरानी प्रतिनिधिमंडल के इस्लामाबाद पहुंचने के साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच उस बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता की नींव रखी गई है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

पाक सेना प्रमुख ने किया स्वागत, ये दिग्गज हैं शामिल

ईरानी प्रतिनिधिमंडल के इस्लामाबाद पहुंचने पर पाकिस्तान के शीर्ष अधिकारियों और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने उनका भव्य स्वागत किया।

ईरान के इस खास दल में विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व कमांडर मोहम्मद बाघर ज़ोलघाद्र और सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती शामिल हैं।

वहीं, दूसरी ओर अमेरिका का प्रतिनिधित्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance), विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर कर रहे हैं।

अमेरिका की सख्त चेतावनी: ‘हमारे साथ खिलवाड़ न करे ईरान’

वार्ता शुरू होने से पहले ही अमेरिका ने अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। वॉशिंगटन से रवाना होने से पहले उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, “ईरान को अमेरिका के साथ ‘खिलवाड़’ नहीं करना चाहिए।

यदि ईरानी अच्छी नीयत से बातचीत करेंगे, तो हम दोस्ती का हाथ बढ़ाएंगे, लेकिन अगर उन्होंने चालाकी की, तो हमारी टीम नरम नहीं पड़ेगी।”

इससे पहले ट्रंप ने भी चेतावनी दी है कि यदि यह बातचीत विफल होती है, तो ईरान पर नए सिरे से हमले किए जा सकते हैं।

ट्रंप ने साफ किया है कि उनकी प्राथमिकता ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है और वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को हर हाल में खोलेंगे।

ईरान का पलटवार: ‘हमें अमेरिका पर भरोसा नहीं’

ईरान ने भी बातचीत की मेज पर बैठने से पहले अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा, “हमारी नीयत अच्छी है, लेकिन हमें अमेरिकियों पर बिल्कुल भरोसा नहीं है।

उनके साथ बातचीत का हमारा इतिहास केवल ‘टूटे हुए वादों’ का रहा है।” ईरान ने वार्ता को सफल बनाने के लिए दो प्रमुख शर्तें रखी हैं:

  1. लेबनान में तत्काल युद्धविराम (Ceasefire)।

  2. वैश्विक स्तर पर जब्त की गई ईरान की संपत्तियों की रिहाई।

हिजबुल्लाह से कोई बात नहीं करेगा इजरायल

इस पूरी शांति प्रक्रिया में इजरायल का रुख सबसे अहम है। अमेरिका में इजरायल के राजदूत येचिएल लाइटर ने स्पष्ट किया है कि इजरायल लेबनान सरकार के साथ औपचारिक शांति वार्ता शुरू करने पर सहमत हो गया है, लेकिन वह किसी भी कीमत पर आतंकवादी संगठन ‘हिजबुल्लाह’ के साथ युद्धविराम पर चर्चा नहीं करेगा।

अब देखना यह होगा कि इस्लामाबाद की यह मेज मध्य-पूर्व में शांति लाती है या फिर इस वार्ता के विफल होने पर दुनिया को एक और विनाशकारी युद्ध का सामना करना पड़ेगा।

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