Israel Iran Conflict

इस्राइली पीएम ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को तबाह करने की खाई कसम

अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले नेतन्याहू की हुंकार: ‘ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अर्दोआन के खिलाफ जारी रहेगी जंग’

यरुशलम/इस्लामाबाद: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पाकिस्तान में होने वाली संभावित अमेरिका-ईरान वार्ता से ठीक पहले इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बेहद कड़ा और आक्रामक बयान देकर वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है।

नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि इस्राइल, ईरान और उसके सहयोगी आतंकी गुटों के खिलाफ अपने अभियान को किसी भी कीमत पर नहीं रोकेगा।

इस दौरान उन्होंने तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोआन पर भी तीखा प्रहार किया और उन्हें कुर्द नागरिकों का ‘नरसंहार’ करने वाला नेता करार दिया।

अर्दोआन और ईरान पर नेतन्याहू का सीधा हमला

इस्राइली प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा, “मेरे नेतृत्व में इस्राइल, ईरान की आतंकी सरकार और उसके सहयोगियों के खिलाफ अपनी लड़ाई को पूरी ताकत से जारी रखेगा।

 

दूसरी ओर, अर्दोआन जैसे नेता उन्हें पनाह देते हैं, जिन्होंने खुद अपने ही कुर्द नागरिकों का बेरहमी से नरसंहार किया है।”

टाइम्स ऑफ इस्राइल की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब तुर्किये के अभियोजक इस्राइली प्रधानमंत्री और अन्य अधिकारियों पर गाजा और 2025 में गाजा जाने वाले जहाजों को रोकने के मामले में ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ का मुकदमा चलाने की मांग कर रहे हैं।

‘ईरान के खिलाफ अभियान अभी खत्म नहीं हुआ’

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नेतन्याहू ने कहा कि इस्राइल ने ईरान की परमाणु महत्वकांक्षाओं पर लगाम कसने में ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है, लेकिन यह अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है।

उन्होंने अपने एक वीडियो संदेश में कहा, “ईरान के खिलाफ हमारा अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है।

हमें अभी बहुत कुछ करना है, लेकिन हम गर्व से कह सकते हैं कि हमारे पास ऐतिहासिक उपलब्धियां हैं।”

परमाणु हथियार के बेहद करीब था ईरान

नेतन्याहू ने इस बात का दावा किया कि इस्राइल को यह आक्रामक अभियान इसलिए चलाना पड़ा क्योंकि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने के बेहद करीब पहुंच चुका था।

उनके मुताबिक, ईरान हर दिन सैकड़ों मिसाइलें बनाने की क्षमता विकसित कर रहा था, जो इस्राइल के अस्तित्व के लिए एक सीधा खतरा था।

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि खामेनेई अपने मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को इतनी गहराई में छिपाना चाहते थे कि वहां तक बी-2 बमवर्षक विमान भी न पहुंच सकें।

ईरान के पास 400 किलोग्राम से अधिक संवर्धित यूरेनियम होने के सवाल पर नेतन्याहू ने दो टूक कहा कि इसे या तो कूटनीति से हटाया जाएगा या फिर ताकत के इस्तेमाल से। उन्होंने कहा, “वे हमें घेरना चाहते थे, लेकिन अब हम उन्हें घेर रहे हैं।”

इस्राइल ने तोड़ी खौफ की दीवार, कमज़ोर हुआ ईरान

नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि अमेरिका और ईरान के वार्ताकार इस समय इस्लामाबाद में संभावित संघर्षविराम पर चर्चा कर रहे हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि पिछले साल जून में इस्राइल ने हमला करके ‘डर की दीवार’ को तोड़ दिया था। नेतन्याहू के अनुसार, ईरान अब अंदरूनी संघर्षों से जूझ रहा है और बेहद कमजोर हो चुका है।

वहां की सरकार अपनी जनता की जरूरतें पूरी करने में भी नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने कहा, “जो हमें मिटाने की धमकी देते थे, वे आज अपने ही अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।”

हिजबुल्ला का निरस्त्रीकरण है जरूरी शर्त

सीरिया-यमन में हूती, लेबनान में हिजबुल्ला और गाजा में हमास को इस्राइल के खिलाफ बताते हुए नेतन्याहू ने कहा कि इन मोर्चों पर इस्राइल ने बड़ी सफलता प्राप्त की है।

लेबनान के साथ चल रहे तनाव पर उन्होंने कहा कि हिजबुल्ला के साथ कोई भी शांति समझौता तभी संभव है जब उसका पूरी तरह से निरस्त्रीकरण हो।

इस्राइल ने उत्तरी सीमा पर नागरिकों की सुरक्षा के लिए 8 से 10 किलोमीटर का बफर जोन (सुरक्षा क्षेत्र) भी बना लिया है।

स्थानीय मीडिया के अनुसार, इस्राइल और लेबनान के बीच अगले सप्ताह अमेरिका की मध्यस्थता में बातचीत हो सकती है।

हालांकि, नेतन्याहू के कड़े रुख से यह स्पष्ट है कि इस्राइल गाजा और लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई रोकने के मूड में नहीं है।

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