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केरल में वामदलों का सूर्यास्त: CM विजयन का इस्तीफा

केरल में वामदलों का ‘सूर्यास्त’: पिनराई विजयन ने दिया इस्तीफा, 5 दशक बाद देश में कोई ‘लाल’ सरकार नहीं”

तिरुवनंतपुरम: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

केरल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत और एक पुराने युग के अंत की पटकथा लिख दी है।

9 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव के परिणामों में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) की करारी हार के बाद पिनराई विजयन ने सोमवार को मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा दे दिया।

इस इस्तीफे के साथ ही केरल में विजयन का एक दशक (10 साल) लंबा शासन समाप्त हो गया है।

राज्यपाल ने इस्तीफा किया मंजूर

राजभवन द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने पिनराई विजयन का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

हालांकि, राज्यपाल ने उनसे अनुरोध किया है कि जब तक नई सरकार का गठन और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक वे कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में अपना कार्यभार संभालते रहें।

UDF की शानदार वापसी, BJP ने भी खोला खाता

लगातार दो कार्यकालों तक राज्य की सत्ता संभालने वाले विजयन को इस बार कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (UDF) के हाथों करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है।

निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 140 सदस्यीय केरल विधानसभा की तस्वीर इस प्रकार है:

  • UDF (कांग्रेस गठबंधन): 102 सीटों पर शानदार जीत के साथ सत्ता में वापसी।

  • LDF (वामपंथी गठबंधन): मात्र 35 सीटों पर सिमट गया।

  • BJP: भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए राज्य में 3 सीटें जीतकर पहली बार केरल विधानसभा में अपना खाता खोला है।

5 दशक बाद देश में वामपंथ का पूरी तरह सफाया

इस चुनाव परिणाम का सबसे बड़ा ऐतिहासिक पहलू यह है कि केरल से वामपंथी सरकार की विदाई के साथ ही देश में 5 दशक (50 साल) बाद पहली बार ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है, जब भारत के किसी भी राज्य में वाम दलों (Communist Parties) की सरकार नहीं बची है।

गौरतलब है कि केरल ही वह राज्य था, जहां से 1957 में वामदलों ने पहली बार सत्ता का स्वाद चखा था।

तब ईएमएस नंबूदिरीपाद के नेतृत्व में पहली बार देश में गैर-कांग्रेसी और वामपंथी सरकार बनी थी। इसके बाद वामपंथ ने देश के कई हिस्सों में पैर पसारे।

पश्चिम बंगाल में तो 1977 से लेकर लगातार 34 वर्षों तक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) सत्ता पर काबिज रही।

लेकिन आज स्थिति यह है कि बंगाल में वामदल एक सीट के लिए संघर्ष कर रहे हैं और अब उनके आखिरी गढ़ केरल से भी उनकी विदाई हो गई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वर्ष 1977 के बाद यह देश के लोकतांत्रिक इतिहास में पहला मौका है, जब वामदल पूरे देश में सत्ता से पूरी तरह बाहर हो गए हैं।

Santosh SETH

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