Prime Minister Narendra Modi addressing the centenary celebrations of the Union Public Service Commission (UPSC) at Bharat Mandapam, New Delhi.
यूपीएससी के 100 वर्ष: पीएम मोदी ने दिया ‘नागरिक देवो भव’ का मंत्र, परीक्षा चक्र छोटा करने पर जोर”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के 100 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर मंगलवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में भव्य शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सिविल सेवाओं के गौरवशाली इतिहास, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य के सुधारों पर व्यापक चर्चा की।
उन्होंने प्रशासन के लिए ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ और ‘नागरिक देवो भव’ (नागरिक ईश्वर के समान हैं) को 21वीं सदी के सुशासन का नया और मूल मंत्र बताया।
इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री ने यूपीएससी की समृद्ध विरासत को सम्मानित करते हुए एक स्मारक डाक टिकट, एक विशेष सिक्का और 100 महत्वपूर्ण केस कानूनों (Case Laws) का संकलन जारी किया।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने स्वतंत्र भारत में सिविल सेवाओं की मजबूत नींव रखने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उन्होंने नवगठित राष्ट्र को सक्रिय शासन के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना प्रदान की थी।
प्रधानमंत्री ने चयन आयोगों से भर्ती प्रक्रिया में बड़े बदलाव का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सिविल सेवा परीक्षाओं में केवल किताबी ज्ञान का परीक्षण नहीं होना चाहिए, बल्कि यह भी परखा जाना चाहिए कि उम्मीदवार के भीतर जनसेवा की कितनी प्रेरणा है।
उन्होंने जोर दिया कि हमें ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो पद के लालच से नहीं, बल्कि लोक सेवा के भाव से प्रेरित होकर इस क्षेत्र में आना चाहते हैं।
भविष्य के अधिकारियों को एआई (AI), डीपफेक, सूचना युद्ध और जलवायु न्याय जैसी नई सदी की जटिल चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा।
लाखों युवाओं और उनके परिवारों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए पीएम मोदी ने एक बेहद महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि यूपीएससी की परीक्षा का चक्र काफी लंबा होता है, जिससे उम्मीदवारों के परिवारों पर कोचिंग फीस, कमरे का किराया और परिवहन का भारी आर्थिक बोझ पड़ता है।
गुणवत्ता से समझौता किए बिना इस परीक्षा चक्र को छोटा किया जाना चाहिए, जो कि समानता के अधिकार की दिशा में एक बड़ा सुधार होगा।
समारोह में यूपीएससी की समावेशी उपलब्धियों की सराहना करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि 1952 में सिविल सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी मात्र 3 प्रतिशत थी, जो आज बढ़कर 30 प्रतिशत से अधिक हो गई है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 2014 के बाद से नियुक्त यूपीएससी के चार अध्यक्षों में से तीन महिलाएं रही हैं। 1976 के बाद से परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों की संख्या में 45 गुना की वृद्धि हुई है,
जिसमें अब शहरी अभिजात्य वर्ग के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली युवा भी बड़ी संख्या में सफलता हासिल कर रहे हैं।
| विषय / बिंदु | प्रधानमंत्री के संबोधन की प्रमुख बातें |
| आयोजन स्थल | भारत मंडपम, नई दिल्ली (UPSC के 100 वर्ष पूरे होने पर) |
| प्रमुख विमोचन | स्मारक डाक टिकट, विशेष सिक्का और 100 महत्वपूर्ण केस कानूनों का संकलन |
| प्रशासन का नया मंत्र | ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ और ‘नागरिक देवो भव’ (नागरिक ईश्वर के समान) |
| नई सदी की चुनौतियां | एआई (AI), डीपफेक, सूचना युद्ध, एल्गोरिथम पूर्वाग्रह, जलवायु न्याय |
| सबसे बड़ा सुधार सुझाव | आर्थिक बोझ कम करने के लिए सिविल सेवा परीक्षा चक्र को छोटा करना |
| महिला सशक्तिकरण | 1952 में महिला भागीदारी 3% थी, जो आज बढ़कर 30% से अधिक हो गई है |
| नेतृत्व में बदलाव | 2014 के बाद से नियुक्त 4 यूपीएससी अध्यक्षों में से 3 महिलाएं |
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