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भदोही: ‘मुसहर’ बताकर प्रसूता को अस्पताल से भगाया, डॉक्टर बर्खास्त

भदोही: ‘मुसहर’ बताकर प्रसूता को अस्पताल से भगाया, सड़क पर हुई डिलीवरी; ईएमओ बर्खास्त, सीएमएस पर लटकी तलवार”

ज्ञानपुर (भदोही): द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भदोही जिले के महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल (Maharaja Chet Singh District Hospital) में इंसानियत और स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक बेहद संगीन मामला सामने आया है।

अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों ने एक गर्भवती महिला को उसकी जाति ‘मुसहर’ (वनवासी) बताकर भर्ती करने से साफ इनकार कर दिया।

नतीजतन, महिला को अस्पताल के ठीक सामने सड़क पर चादर की ओट में बच्चे को जन्म देना पड़ा।

इस अमानवीय घटना का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी और सीएमओ ने महज 24 घंटे के भीतर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए एक डॉक्टर को बर्खास्त कर दिया है, जबकि सीएमएस सहित कई अन्य पर कड़ी कार्रवाई की तलवार लटक गई है।

क्या था पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, जोरई गांव निवासी वनवासी समुदाय की 20 वर्षीय गर्भवती महिला ‘रानी’ को मंगलवार देर रात प्रसव पीड़ा होने पर एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया था।

परिजनों का सीधा आरोप है कि अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों ने उनकी ‘मुसहर’ जाति को देखकर उन्हें अस्पताल में भर्ती करने से मना कर दिया और दुत्कार कर भगा दिया।

परिजन लाचार होकर उसे वापस ले जा ही रहे थे कि अस्पताल के बाहर ही रानी की प्रसव पीड़ा तेज हो गई। मजबूरन, सड़क किनारे ही चादर की आड़ में परिजनों को डिलीवरी करानी पड़ी।

सीएमओ ने अस्पताल पहुंचकर लगाई फटकार, बनाई टीम

इस खौफनाक लापरवाही और ग्रामीणों के आक्रोश की खबर मिलते ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. एसके चक तत्काल एक्शन में आए।

वे सीधे गांव पहुंचे, प्रसूता और नवजात बच्चे को अपनी निगरानी में लेकर वापस अस्पताल लाए और उन्हें वार्ड में भर्ती कराया। सीएमओ ने अस्पताल के लापरवाह स्टाफ को कड़ी फटकार लगाई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीएमओ डॉ. ओपी शुक्ला के नेतृत्व में 4 सदस्यीय जांच टीम (डिप्टी सीएमओ डॉ. आशीष सरोज और डॉ. शालिनी पाठक सहित) का गठन किया गया, जिसने बुधवार देर शाम अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी।

डीएम के निर्देश पर इन डॉक्टरों पर गिरी गाज

डीएम शैलेश कुमार के कड़े निर्देश और जांच रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने निम्नलिखित कार्रवाई की है:

  • ईएमओ डॉ. पंकज की सेवा समाप्त: जिस समय प्रसूता अस्पताल पहुंची, उस समय इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (EMO) डॉ. पंकज ड्यूटी पर थे।

  • उन्होंने मरीज को देखे बिना ही रेफर की पर्ची बना दी और एंबुलेंस बुलाने की जहमत भी नहीं उठाई। इस घोर लापरवाही पर उन्हें तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है।

  • सीएमएस डॉ. अजय तिवारी व डॉ. नीलीमा धवन पर शासन को पत्र: प्रसूता को एक दिन पहले देखने वाली महिला चिकित्सक डॉ. नीलीमा धवन (जिन्होंने खून की कमी के बावजूद मरीज को भर्ती नहीं किया) और इस पूरे मामले में घोर लापरवाही बरतने वाले अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. अजय तिवारी के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।

  • डॉ. मुकेश प्रजापति का वेतन रुका, नर्स का तबादला: मामले में लापरवाही के आरोप में प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश प्रजापति का वेतन रोक दिया गया है, जबकि स्टाफ नर्स नीलम मौर्य का तबादला अन्यत्र कर दिया गया है।

जिला अस्पताल ज्ञानपुर (भदोही) प्रसव प्रकरण: कार्रवाई का ब्यौरा

अधिकारी/कर्मचारी का नाम पदनाम आरोप / लापरवाही विभाग द्वारा की गई कार्रवाई
डॉ. पंकज EMO (इमरजेंसी) बिना देखे मरीज को रेफर करना, एंबुलेंस न बुलाना सेवा समाप्त (बर्खास्त)
डॉ. अजय तिवारी CMS (अस्पताल प्रमुख) प्रशासनिक लापरवाही व मामले को गंभीरता से न लेना शासन को कार्रवाई हेतु पत्र
डॉ. नीलीमा धवन महिला चिकित्सक खून की कमी के बावजूद मरीज को भर्ती न करना शासन को कार्रवाई हेतु पत्र
डॉ. मुकेश प्रजापति प्रसूति रोग विशेषज्ञ ड्यूटी में शिथिलता एवं लापरवाही वेतन रोका गया
नीलम मौर्य स्टाफ नर्स मरीज के साथ गलत व्यवहार और शिथिलता तत्काल प्रभाव से तबादला