जौनपुर: वाटरशेड विकास से किसानों की आय में 50% वृद्धि, भूजल स्तर सुधरा
जौनपुर: जल संरक्षण से संवर रहा किसानों का भविष्य, ‘रिफॉर्म उत्सव’ के जरिए वाटरशेड विकास बना जन आंदोलन”
जौनपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : वरुण यादव की रिपोर्ट
जनपद में जल और मिट्टी संरक्षण की दिशा में चलाए जा रहे अभियानों के बेहद सुखद और उत्साहजनक परिणाम सामने आने लगे हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY 2.0) के वाटरशेड विकास घटक के तहत ‘रिफॉर्म उत्सव’ मनाया जा रहा है।
इसका मुख्य उद्देश्य नागरिक केंद्रित सुधारों को ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाना और जल संरक्षण को एक ‘जन आंदोलन’ का रूप देना है।
भूमि संरक्षण अधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि मिट्टी को बचाने के लिए पानी को सहेजना बेहद जरूरी है, और इसी मंत्र पर काम करते हुए जौनपुर के गांवों को जल-सुरक्षित बनाने का खाका तैयार किया गया है।
भूजल स्तर में 1.5 मीटर का इजाफा, किसानों की आय 50% बढ़ी
प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार वर्षों में जौनपुर जनपद में लगभग 5500 हेक्टेयर क्षेत्र को वाटरशेड विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत कवर किया गया है।
इन प्रयासों से परियोजना क्षेत्रों के भूजल स्तर में 1.50 मीटर तक की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। सिंचाई की बेहतर व्यवस्था होने से खेती के क्षेत्रफल और दुग्ध उत्पादन में 30% तक का इजाफा हुआ है।
सूखा प्रभावित जिन इलाकों में पहले एक भी फसल उगाना मुश्किल था, वहां अब किसान दो या उससे अधिक फसलें ले रहे हैं।
फसलोत्पादन में 25% की बढ़ोतरी हुई है, जिसके परिणामस्वरूप किसानों की वार्षिक आय में 50% तक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
7 की जगह अब 5 साल में पूरी हो रहीं परियोजनाएं
भूमि संरक्षण अधिकारी ने बताया कि योजनाओं का लाभ किसानों को जल्द से जल्द मिले, इसके लिए ‘जल्द काम-जल्द परिणाम’ की नीति अपनाई गई है।
अब वाटरशेड विकास परियोजनाओं की अवधि 7 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दी गई है। इससे जल और मिट्टी संरक्षण के काम तेजी से पूरे हो रहे हैं।
बेहतर जल उपलब्धता और मृदा नमी के कारण बंजर व क्षरित भूमि का भी पुनरुद्धार हो रहा है।
‘विकसित भारत @ 2047’ के तहत सूखा-मुक्त भारत का लक्ष्य
जल संरक्षण के इन लाभों को सीधे खेतों तक पहुंचाने के लिए किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, उन्नत कृषि उपकरण, और फसल विविधीकरण (Crop Diversification) के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
समुदाय की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने “वाटरशेड यात्रा” और “वाटरशेड महोत्सव” का आयोजन किया है।
‘सबकी योजना, सबका विकास’ अभियान के साथ जुड़कर यह पहल अब एक जन आंदोलन बन चुकी है।
इसका अंतिम लक्ष्य ‘विकसित भारत @ 2047’ के विजन के अनुरूप एक सूखा-मुक्त और समृद्ध ग्रामीण भारत का निर्माण करना है।
जौनपुर में वाटरशेड विकास (PMKSY 2.0): मुख्य उपलब्धियां
| मानक / विवरण | हासिल किए गए परिणाम / आंकड़े |
| कवर किया गया कुल क्षेत्र (4 वर्ष) | लगभग 5,500 हेक्टेयर |
| भूजल स्तर (Groundwater) में सुधार | 1.50 मीटर तक की वृद्धि |
| कृषि क्षेत्र एवं दुग्ध उत्पादन में वृद्धि | 30% तक की बढ़ोतरी |
| फसलों के उत्पादन में वृद्धि | 25% का इजाफा |
| किसानों की वार्षिक आय में वृद्धि | 50% तक का शानदार उछाल |
| परियोजना की नई कार्य अवधि | 7 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष की गई |
| प्रमुख कार्यक्रम व आयोजन | रिफॉर्म उत्सव, वाटरशेड यात्रा और वाटरशेड महोत्सव |











