Officials inspecting fire safety equipment and fire extinguishers in a government school in Jaunpur

जौनपुर के स्कूलों में फायर सेफ्टी के सख्त निर्देश

जौनपुर के सभी स्कूलों में फायर सेफ्टी व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश, एक्सपायर्ड अग्निशमन यंत्र तुरंत बदलने के आदेश”

जौनपुर : द पॉलिटिक्स अगेन : वरुण यादव की रिपोर्ट

विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जौनपुर जिला प्रशासन ने जिले के सभी परिषदीय विद्यालयों में अग्निशमन (फायर सेफ्टी) व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश जारी किए हैं।

जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) समीर ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों और विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को तत्काल फायर सेफ्टी उपकरणों की जांच सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।

सभी स्कूलों में होगी फायर एक्सटिंग्विशर की जांच

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक विद्यालय में लगे फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशमन यंत्र) की कार्यशीलता की तत्काल जांच की जाए।

जिन विद्यालयों में अग्निशमन यंत्रों की वैधता (एक्सपायरी) समाप्त हो चुकी है, वहां बिना किसी देरी के उन्हें रिफिल कराया जाए या आवश्यकता होने पर नए अग्निशमन यंत्र उपलब्ध कराए जाएं।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा उपकरणों की नियमित निगरानी और समय पर रखरखाव किसी भी आपात स्थिति में बड़े हादसे को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

बीएसए समीर ने कहा कि विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

यदि किसी कारणवश आग लगने जैसी आपात स्थिति उत्पन्न होती है तो कार्यशील अग्निशमन उपकरण प्रारंभिक स्तर पर आग पर नियंत्रण पाने में प्रभावी साबित हो सकते हैं।

उन्होंने सभी विद्यालयों को सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करने और फायर सेफ्टी उपकरणों को हर समय उपयोग योग्य स्थिति में रखने के निर्देश दिए।

अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) तथा विद्यालय प्रधानाध्यापकों को निर्देशित किया है कि शासन और जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही विद्यालयों में सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा भी की जाए।

प्रशासन का उद्देश्य है कि जिले के सभी सरकारी विद्यालयों में सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाए, ताकि विद्यार्थियों और शिक्षकों को किसी भी संभावित दुर्घटना से सुरक्षित रखा जा सके।